नई दिल्ली: अरावली पहाड़ियों की ‘नई परिभाषा’ को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत सोमवार को इस पर सुनवाई करेगी। लाइव लॉ और बार एंड बेंच के अनुसार ‘इन री: अरावली हिल्स और रेंज की परिभाषा और उससे जुड़े मुद्दे’ शीर्षक वाले इस मामले की सुनवाई 29 दिसंबर को होगी। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी। इस पीठ में जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस एजी मसीह भी शामिल होंगे।
इससे पहले केंद्र सरकार की सिफारिशों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की जिस परिभाषा को स्वीकार किया है, उसके अनुसार आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर (328 फीट) ऊँचे जमीन के हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। दो या उससे ज्यादा ऐसी पहाड़ियाँ, जो 500 मीटर के दायरे के अंदर हों और उनके बीच जमीन भी मौजूद हो, तब उन्हें अरावली शृंखला का हिस्सा माना जाएगा।
पर्यावरणविदों का कहना है कि सिर्फ ऊँचाई के आधार पर अरावली को परिभाषित करने से कई ऐसी पहाड़ियों पर खनन और निर्माण के लिए दरवाजा खुल जाने का खतरा पैदा हो जाएगा, जो 100 मीटर से छोटी हैं, झाड़ियों से ढँकी हैं और पर्यावरण के लिए जरूरी हैं। अरावली पहाड़ियों की ‘नई परिभाषा’ पर हो रहे वि*रोध के बीच पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है। बयान के अनुसार केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी कर अरावली क्षेत्र में किसी भी नई माइनिंग लीज को देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह प्रति*बंध पूरी अरावली पर समान रूप से लागू होगा।
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