नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार दिया है, जिसमें पीरियड्स के दौरान छात्राओं और महिला कर्मचारियों के लिए पेड लीव देने की नीति बनाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे हालात में उन्हें कोई भी काम नहीं देगा और इस तरह के प्रावधान अनजाने में जेंडर के प्रति रूढ़ियों को और बढ़ावा देंगे।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी इस मांग पर विचार कर सकते हैं और सभी संबंधित पक्षों से सलाह करने के बाद पीरियड्स के दौरान छुट्टी पर कोई नीति बनाने की संभावना पर गौर कर सकते हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा की ये दलीलें डर पैदा करने, महिलाओं को कमतर बताने और यह कहने के लिए दी गई हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है। यह एक सकारात्मक अधिकार है लेकिन उस एम्प्लॉयर के बारे में सोचिए जिन्हें वेतन के साथ छुट्टी देनी पड़ेगी।
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