
शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत 300 किलो मावा व 165 लीटर घी किया सीज
कीड़े लगे हुए 300 किलो खीरमोहन करवाएं नष्ट
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे शुद्व के लिए युद्व अभियान के तहत आज बुधवार को चिकित्सा विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए गंगापुर सिटी व वजीरपुर की फर्मों के सैम्पल लिये। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. तेजराम मीना ने बताया कि गंगापुर सिटी व वजीरपुर में अलग – अलग ब्रांड के घी व अन्य सामग्रियों के सैंपल लिए। डाॅ. मीना ने बताया कि विभाग के फूड सेफ्टी अधिकारी विरेन्द्र कुमार व उनकी टीम द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए गंगापुर सिटी स्थित मैसर्स गर्ग मिल्क एंड फूड प्राॅडक्ट्स के यहां से 4 सैम्पल लिये गए। 1 सैम्पल लूज घी, 1 सैम्पल पनीर, 1 सैम्पल मावा व 1 सैम्पल खीरमोहन के लिए गए। साथ ही 165 लीटर लूज घी सीज किया गया।

गंगापुर सिटी की गर्ग मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट की ही वजीरपुर स्थित मेन्युफेक्चरिंग फेक्ट्री कृष्णा चिलिंग सेंटर पर भी विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए बड़ी कार्रवाई की। फेक्ट्री में 300 किलो खीरमोहन में कीड़े लगे हुए थे, मधुमक्खी, झींगुर पड़े हुए थे। उस 300 किलो खीरमोहन को मौके पर ही नष्ट करवाया गया। साथ ही चाशनी को भी नष्ट करवाया गया। फेक्ट्री में ही मौजूद मावा बहुत पुराना दिखाई देने के संदेह पर और मावे की क्वालिटी को देखते हुए 300 किलो मावा सीज किया गया। सैम्पल की रिपोर्ट आने के पश्चात फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के सीज किए गए घी पर कार्रवाई की जाएगी। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
वहीं राज्य सरकार के निर्देशानुसार खाघ पदार्थों में मिलावट की रोकथाम के लिए मिलावटी खाघ सामग्री के मामालों का निस्तारण अब 90 दिन की अवधि में किया जाएगा। खाघ पदार्थों के सब स्टैंडर्ड, मिसब्रांड व अनसेफ के प्रकरणों की आवश्यक जांच के बाद चालान एडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है, जहां त्वरित सुनवाई होगी। ऐसे में मिलावट, अशुद्व व अवधिपार मामलों में जल्द व सख्त कार्रवाई हो सकेगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. तेजराम मीना ने सभी जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि जिलेवासी लूज या खुला हुआ घी प्रयोग में ना लाएं। यह किसी भी प्रकार से सेहत के लिए लाभदेय नहीं है।
इन लूज घी में पाम ऑयल अथवा अन्य प्रकार के तेल होते हैं जो कि हानिकारक हैं। दुकानदार वनस्पति तेल, पाम ऑयल को घी, पूजा, दिया बाती के लिए काम में आने वाला घी बता कर बेचते हैं। बहुत ही कम कीमत में बाजार में मिलने वाला घी, घी ना होकर नकली, मिलावटी वनस्पति अथवा पाम ऑयल होते हैं। इसलिए जब भी घी खरीदें हमेशा उस पर लिखे हुए लेबल, सामग्री आदि के बारे में पढ़ कर जांच परख कर ही घी खरीदें। कम कीमत में मिलने वाले घी को कई परिवार जन अपने घर की गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं के लिए खरीद कर प्रयोग में लाते हैं, ऐसा घी गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं के लिए लाभदायक ना होकर अत्यधिक घातक है। साथ ही ऐसे पदार्थ युवा पीढ़ी के लिए भी घातक है, ऐसे पदार्थों का सेवन युवाओं की नस्ल भी खतरे में पड़ रही है। ऐसे में सभी लोग शुद्व घी का प्रयोग करें।