Thursday , 23 April 2026
Breaking News

मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं रणथंभौर के त्रिनेत्र गणेश

आपने भगवान महादेव के त्रिनेत्र मुखाकृति के दर्शन अवश्य किए होंगे परन्तु उनके पुत्र गणेश जी की त्रिनेत्र प्रतिमा वह भी पत्नियों रिद्धी-सिद्धी और पुत्रों शुभ-लाभ के साथ दर्शन शायद ही किए हों। जी हां, ऐसे त्रिनेत्र गणेश जी की मूर्ति के दर्शन के लिए रणथंभौर गणेश मन्दिर एक मात्र स्थान है। यह पूर्वी राजस्थान के सवाई माधोपुर में विश्व विख्यात रणथंभौर बाघ परियोजना के बीच सुरमय वादियों से घिरा प्राचीन मन्दिर है। सवाई माधोपुर से दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग सहित अन्य प्रमुख शहरों से रेल, सड़क तथा नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर से जुड़ा हुआ है।

 

रेलवे स्टेशन से करीब 14 किलोमीटर दूर रणथंभौर दुर्ग तक जाने के लिए चौपहिया तथा दुपहिया वाहनों से पहुंचा जा सकता है। दुर्ग के गेट से मन्दिर तक पैदल ही जाना होता है। वृद्ध तथा असहाय लोगों के लिए पालकी की व्यवस्था है। प्रथम पूज्य के इस मन्दिर में प्रतिदिन सैंकड़ो श्रद्धालु पहुंचते है, इसके अलावा देशी-विदेशी मेहमान भी आते हैं। शादी – विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों के प्रथम निमंत्रण पत्र तथा बुआई से पहले कृषकों द्वारा गणेश जी को न्योता दिए जाने की प्राचीन परम्परा आज भी निरन्तर जारी है।

 

 

Trinetra Ganesh of Ranthambore fulfills wishes

 

निमंत्रण पत्र के साथ 5 कंकर पूजकर घर ले जाना तथा कार्य संपन्न होने पर इन्हें वापस लौटाना तथा मन्दिर से बीनकर ले जाने वाले अनाज को बीज में मिलाकर बोना और समृद्धि तथा खुशहाली प्राप्त करना त्रिनेत्र गणेश का आशीष माना जाता है। प्रथम पूज्य को प्रथम निमंत्रण पर भेजने की परम्परा के चलते श्री-श्री1008 श्री गणेश की महाराज रणतभंवर के पत्ते पर विभिन्न भाषाओं वाले हजारों निमंत्रण पत्र डाक से पहुंचते हैं। भाद्रपद शुक्लचतुर्थी अर्थात गणेश चतुर्थी के अवसर पर लगने वाले मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचते है, इस कारण करीब 5 किलोमीटर अधिक पैदल चलना पड़ता है।

 

तृतीया से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है, कनक डंडवत और गणेश के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तीमय हो उठता है। गणपति की पूजा कर पठार पर घर बनाने, दाल-बाटी चूरमा बनाकर गणेश जी को भोग लगाना और प्रसादी पाना भी मान्यता का हिस्सा बन गया है। मन्दिर के बारे में अनेक किवदंतियां है, परन्तु यह र्निविवाद है कि ई. सन 944 से दुर्ग निर्माण से पहले इस मन्दिर का निर्माण किया गया था। किले पर मुस्लिमों के अनेक हमले हुए तथा किला खिलजी और मुगल शासकों के अधीन रहा किन्तु अपनी चमत्कारी शक्ति से यह आज भी उसी श्रद्धा और आस्था का केन्द्र बना हुआ है जितना चौहान वंश के समय में था।

About Vikalp Times Desk

Check Also

New 'king' of the jungle Cheetah KP-3 sets up camp in Shergarh Wildlife Sanctuary

जंगल में नया ‘राजा’? चीता KP-3 ने शेरगढ़ में जमाया डेरा, 2 खरगोशों का किया शि*कार

कोटा: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से निकलकर बारां …

Sawai madhopur acb action on nadoti sdm Kajal Meena Karuali News 17 April 26

1 लाख मांगे, 60 हजार में पकड़ी गई SDM काजल मीणा, ACB ने ऐसे बिछाया जाल

करौली: करौली जिले के नादौती में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सवाई …

lecturer suspended dowry kundera police Husband wife sawai madhopur news

पत्नी की शिकायत पड़ी भारी, दहेज लेने के आरोप लेक्चरर सस्पेंड

सवाई माधोपुर: राजस्थान के शिक्षा विभाग ने दहेज लेने के आरोप में एक लेक्चरर को …

Unique initiative by Sawai Madhopur SP Jyeshtha maitrei police personnel will now be able to celebrate special days with their families.

एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी की अनूठी पहल, पुलिसकर्मी अब परिवार के साथ मना सकेंगे खास दिन

सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) में पुलिसकर्मियों के लिए एक सकारात्मक और मानवीय पहल …

Tragic incident in district hospital Sawai Madhopur Pregnant Woman New Born Baby 14 April 26

जिला अस्पताल में दर्दनाक घटना, प्रसूता और नवजात की मौ*त, डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप

सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) के जिला अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में प्रसूता और …

error: Content is protected !! Contact Vikalp Times Team !