नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के ‘तीन बच्चे वाले बयान’ पर एआईएमआईएम नेता और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अपनी स्थापना से ही आरएसएस लगातार यह झूठा भ्रम फैलाता रहा है कि बढ़ती मुस्लिम आबादी हिंदू आबादी को पीछे छोड़ देगी। मुसलमानों की कुल प्रजनन दर में गिरावट आई है और यह गिरावट अन्य सभी समुदायों से अधिक तेज है। उन्होंने कहा कि क्या नरेंद्र मोदी ने 2024 में संसद के भाषण में जनसंख्या वृद्धि के लिए मुस्लिम समुदाय को दोषी नहीं ठहराया था? और अब वही कह रहे हैं कि तीन बच्चे पैदा करो।
ओवैसी ने पूछा कि लोगों के पारिवारिक जीवन में दखल देने वाले ये कौन होते हैं? ओवैसी ने कहा कि यह याद रखना चाहिए कि केशव बलिराम हेडगेवार, वी.डी. सावरकर को अपना नायक मानते थे। वी.डी. सावरकर ने 1937 में अहमदाबाद में हुए हिंदू महासभा के 19वें अधिवेशन में दो-राष्ट्र सिद्धांत रखा था। बाद में 1940 में मुस्लिम लीग ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को अपनाया। उस समय तक हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग दोनों ही सत्ता में साझेदार थे। उन्होंने कहा कि कई मौके ऐसे रहे हैं जब मोहन भागवत ने मुसलमानों को चोरी का सामान और मुगल बादशाह की औलाद कहा।
ये धर्म संसद कौन आयोजित कर रहा है, जहां मुसलमानों के खुले नर*संहार की बातें की जा रही हैं? ये सब आरएसएस प्रायोजित संगठन हैं। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसी ताकतों को हमेशा के लिए राजनीति से बाहर कर दिया जाए। गुरुवार को आरएसएस के शताब्दी समारोह में बोलते हुए भागवत ने कहा था कि हमारे देश की पॉलिसी हर नागरिक को 2.1 बच्चे रिकमंड करती है। ये देश का एवरेज है। संतान 0.1 तो हो नहीं सकती। इसलिए भारत के हर नागरिक को चाहिए कि उसके घर में तीन बच्चे हों। साथ ही उन्होंने कहा था कि इस्लाम नहीं रहेगा, ऐसी सोच रखने वाला हिंदू नहीं हो सकता।
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