24-25 नवंबर को प्रिंट मीडिया विज्ञापनों का भी अधिप्रमाणन
राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल एवं सोशल मीडिया विज्ञापनों का अधिप्रमाणन आवश्यक है। मतदान दिवस एवं उसके पूर्व दिवस (24 एवं 25 नवंबर) को प्रिंट मीडिया में प्रकाशित किए जाने वाले विज्ञापनों का भी अधिप्रमाणन जरूरी रहेगा। जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेश कुमार ओला ने बताया कि राजनैतिक विज्ञापनों के अधिप्रमाणन के लिए जिला स्तर पर कमेटी का गठन किया गया है। आदर्श आचार संहिता के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल एवं सोशल मीडिया के राजनैतिक विज्ञापनों का प्रसारण अधिप्रमाणन के बाद ही किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान ई-पेपर में प्रकाशित विज्ञापनों, बल्क एसएमएस, सोशल मीडिया, वेब पोर्टल एवं मोबाइल वैन पर प्रसारित होने वाली विज्ञापन सामग्री का भी अधिप्रमाणन आवश्यक है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापनों के प्रमाणीकरण के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को आवेदन करना होगा।
ऐसे करें आवेदन:- राजनैतिक दलों द्वारा विज्ञापन अधिप्रमाणन के लिए निर्धारित प्रपत्र में राज्य स्तर पर अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में बनी विज्ञापन अधिप्रमाणन समिति के समक्ष आवेदन किया जाना है। मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनैतिक दलों को विज्ञापन प्रसारण की तिथि से कम से कम 3 दिन पूर्व तथा अन्य दलों को विज्ञापन प्रसारण से 7 दिन पूर्व आवेदन करना होगा। जिलों के अभ्यर्थियों को इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल एवं सोशल मीडिया में विज्ञापनों के प्रमाणीकरण हेतु ऑडियो-वीडियो के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में गठित विज्ञापन अधिप्रमाणन समिति में आवेदन करना होगा। कमेटी 48 घंटे में आवेदन का निस्तारण करेगी।
विज्ञापन के बारे में यह जानकारी देनी होगी:- आवेदक को विज्ञापन अधिप्रमाणन हेतु प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदन में विज्ञापन की दो ई-कॉपी और प्रमाणित ट्रांसस्क्रिप्ट, आवेदित विज्ञापन के निर्माण एवं प्रसारण की लागत बतानी होगी। साथ ही प्रत्याशी व दल के लिए यह विज्ञापन उपयोगी साबित होगा, यह कथन प्रमाणित करना होगा। प्रत्याशी व दल के अतिरिक्त अगर अन्य व्यक्ति द्वारा विज्ञापन आवेदन किया जाने पर उसे बताना होगा कि इसका संबंध किसी व्यक्ति व दल से नहीं है और न ही उनके द्वारा इसका भुगतान किया गया है। यह भी बताना होगा कि विज्ञापन का भुगतान चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से किया गया है।
इन विज्ञापनों को करवाना होगा पूर्व प्रमाणित:- सार्वजनिक स्थान पर ऑडियो-विजुअल डिसप्ले सहित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर जारी किए जाने वाले सभी प्रस्तावित राजनैतिक विज्ञापनों के लिए पूर्व प्रमाणन की आवश्यकता होती है।
इन्हें नहीं माना जाएगा विज्ञापन:- वेबसाइट, सोशल मीडिया वेबसाइट पर ब्लॉग, स्वयं के अकाउंट पर पोस्ट, अपलोड किए जा रहे संदेशों, टिप्पणियों, फोटो, वीडियो के रूप में किसी भी राजनैतिक सामग्री को राजनैतिक विज्ञापन नहीं माना जाएगा और इसके लिए पूर्व प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होगी। निजी एफएम चौनलों सहित रेडियो पर राजनैतिक प्राकृति के विज्ञापनों पर अधिप्रमाणन नियम लागू होंगे। विज्ञापन अधिप्रमाणन समिति को किसी विज्ञापन का प्रमाणीकरण देने से मना करने का अधिकार है, यदि वह प्रसारण इत्यादि के लिए उपयुक्त नहीं लगता है।
अभ्यर्थी इन बातों का रखें ध्यान:- भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, विज्ञापन प्रसारण में केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 के प्रावधानों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है। किसी भी केबल ऑपरेटर को ऐसे किसी भी विज्ञापन को प्रसारित या पुनः प्रसारित करने से प्रतिबंधित किया जाता है, जो कि निर्धारित कार्यक्रम कोड और विज्ञापन कोड के अनुरूप नहीं है। विज्ञापन से धर्म, नस्ल, भाषा, जाति या समुदाय या किसी भी अन्य आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देने की संभावना नहीं हो। विज्ञापन इस प्रकार डिजाइन किया जाए कि वह देश के कानूनों के अनुरूप हो और उपभोक्ता की नैतिकता, शालीनता और धार्मिक संवेदनशीलता को ठेस न पहुंचे।
राजनैतिक विज्ञापनों में अन्य देशों की आलोचना, धर्मों या समुदायों पर हमला, कुछ भी अश्लील या अपमानजनक, हिंसा के लिए उकसाना, न्यायालय की अवमानना-समकक्ष, राष्ट्रपति और न्यायपालिका की सत्यनिष्ठा पर आक्षेप, राष्ट्र की एकता, संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाली कोई भी चीज, किसी भी व्यक्ति के नाम से कोई आलोचना आदि नहीं पाए जाने चाहिए। मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा या किसी भी पूजा स्थल, धार्मिक पाठ, प्रतीकों, नारों का चुनाव प्रचार के पोस्टर, वीडियो, ग्राफिक्स, संगीत आदि में उपयोग, रक्षा कर्मियों की तस्वीरें और रक्षा कर्मियों से जुड़े समारोहों की तस्वीरें, अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के निजी जीवन के किसी भी पहलू (जो उनकी सार्वजनिक गतिविधियों से नहीं जुड़े हों), असत्यापित आरोपों या विकृतियों के आधार पर अन्य पार्टियों या उनके कार्यकर्ताओं की कोई आलोचना नहीं की जा सकती। किसी राजनैतिक दल या उम्मीदवार के खिलाफ विज्ञापनों की भी अनुमति नहीं दी जा सकती।