वेटलैंड्स इंटरनेशनल और बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी द्वारा दौसा के मोरेल डैम पर एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2022 के अंतर्गत जलीय पक्षियों की गणना की गई। गणना में 4 समूहों के 20 विशेषज्ञ सदस्यों ने भाग लिया। गणना वेटलैंड्स इंटरनेशनल के टी. के. राॅय, बीआरडीएस के नेशनल हैड डाॅ. के. पी. सिंह ने निर्देशन में सम्पन्न हुई। दौसा के डीएफओ वी. केतन कुमार वन विभाग की टीम के साथ उपस्थित रहे।
गणना में बीआरडीएस के गजेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह भरतपुर, सवाई माधोपुर से प्रोफेसर रामलाल बैरवा, जुगराज बैरवा, जयपुर से बाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर किशन मीना, अजय पारिक, राजकुमार चौहान और नरेंद्र आदि ने पक्षियों की पहचान व गणना का कार्य संपन्न किया। गणना के संयोजक बीआरडीएस के राजस्थान स्टेट कॉर्डिनेटर डाॅ. सुभाष पहाड़िया ने बताया कि आज घने कोहरे के कारण गणना में बांध के पूरे क्षेत्रफल में गणना नहीं हो पाई है।
वेटलैंड्स इंटरनेशनल और बीआरडीएस द्वारा 20 जनवरी के बाद पुनः गणना का कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। जलीय पक्षियों की गणना में 63 प्रजातियों की पहचान की गई है। जिनमें 45 प्रवासी व 18 आवासीय प्रजातियां चिन्हित की गई।

गणना में 1 एनडेन्जर्ड, 2 वल्नरेविल और 5 नियर थ्रेटेन्डेड प्रजातियों की पहचान की गई है। जिनमें डालमेशन पेलिकन, इंडियन स्कीमर, रिवर टर्न, पेन्टेड स्टार्क, ब्लैक टेल्ड गोडविट, ब्लैक हेडेड आईबिश, काॅमन पोचार्ड, यूरेशियन कर्ल्यू शामिल हैं। ग्रेट व्हाइट पेलिकन 762, पाइड एवोसेट 118, ब्लैक-टेल्ड गोडविट 250 सहित काॅमन टील 75, नोर्दन पिनटेल 50 और फ्लेमिगों 82 की संख्या में दर्ज किए गए।
बीआरडीएस के पक्षी वैज्ञानिक डाॅ. के. पी. सिंह ने बताया कि भारतीय क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों का माइग्रेशन मुख्यतः सेंट्रल एशियन फ्लाइ-वे से होता है। मोरेल डैम उन वेटलैंड्स में शामिल है, जहां प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां सर्वाधिक पाई जाती हैं। फ्लाईवे की 29 विश्व स्तर पर संकटग्रस्त और खतरे के निकट वाली प्रजातियों में से 9 यहां पाई गई हैं। उप वन संरक्षक दौसा वी. केतन कुमार ने बताया कि प्रवासी प्रजातियों को ध्यान में रखकर इसके संरक्षण व विकास हेतु ग्राम पंचायत की वेटलैंड समिति व जैव विविधता रजिस्टर तैयार किए जाएंगे।
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