नई दिल्ली: यूरोपीय संघ की ओर से पहली बार भारत की किसी रिफाइनरी पर प्रति*बंध लगाए जाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक बयान जारी कर कहा कि यूरोपीय संघ की ओर से लगाए गए ताजा प्रति*बंध हमारे संज्ञान में हैं। भारत किसी भी एकतरफा प्रति*बंध का समर्थन नहीं करता है।
उन्होंने कहा कि हम एक जिम्मेदार देश हैं और हम अपनी कानूनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। भारत सरकार अपने नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा सुरक्षा के प्रावधान को महत्वपूर्ण मानती है। शुक्रवार को यूरोपियन कमीशन की उपाध्यक्ष कजा कलास ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि पहली बार हम भारत में रोसनेफ़्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरी पर प्रति*बंध लगा रहे हैं और फ़्लैग रजिस्ट्री को भी इस प्रति*बंध में शामिल किया गया है।
यूरोपीय संघ ने यूक्रेन जंग को लेकर रूस पर 18वें दौर के प्रति*बंधों की घोषणा की है। कजा कलास ने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि यूरोपीय संघ ने रूस पर अबतक के सबसे कड़े प्रति*बंध लगाए हैं। 105 शैडो फ़्लीट वाले जहाजों पर प्रति*बंध लगाने और रूसी बैंकों के एक्सेस को सीमित करके हम क्रेमलिन के यु*द्ध बजट को और कम कर रहे हैं। हाल ही में हाल ही में नेटो के महासचिव मार्क रट ने कहा था अगर ब्राजील, चीन और भारत जैसे देश रूस के साथ व्यापार जारी रखते हैं, तो उन पर सेकेंडरी प्र*तिबंध लगाए जाएंगे।
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