नई दिल्ली: भारत की गैर लाभकारी संस्था ‘फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली’ को 2025 का रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड दिया गया है। यह संस्था आमतौर पर ‘एजुकेट गर्ल्स’ के नाम से जानी जाती है। यह रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय संस्था है। रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड फाउंडेशन ने रविवार को मनीला में विजेताओं की घोषणा की। फाउंडेशन ने कहा कि एजुकेट गर्ल्स को यह सम्मान “लड़कियों और युवा महिलाओं की शिक्षा के जरिए सामाजिक बंदिशों और पुरानी सोच को तोड़ने, अशिक्षा से बाहर लाने और उन्हें कौशल, हिम्मत और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ाने” की प्रतिबद्धता के लिए यह सम्मान दिया गया है।
‘एजुकेट गर्ल्स’ एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो भारत के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करती है। संस्था की वेबसाइट के अनुसार, 2007 से अब तक यह राज्य सरकारों के साथ मिलकर 18 लाख से ज्यादा बच्चियों को स्कूल में दाखिला दिला चुकी है। इसका काम राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के 29 हजार से अधिक गाँवों तक फैला हुआ है। इस संस्था की स्थापना सफीना हुसैन ने की थी। वह संस्था की बोर्ड सदस्य भी हैं।
सफीना हुसैन ने इस सम्मान को लेकर कहा कि रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय नॉन-प्रॉफिट संस्था बनना एजुकेट गर्ल्स और पूरे देश के लिए ऐतिहासिक पल है। हाल ही में सफीना हुसैन को लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी गई थी। 2025 के अन्य विजेताओं में मालदीव की शाहीना अली शामिल हैं, जिन्हें समुद्र और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सम्मानित किया गया है। वहीं फिलीपींस के फ्लावियानो एंटोनियो एल. विलनुएवा को गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए चुना गया है।
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