भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए केंद्र सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम बनाकर 2005 में केंद्र तथा सभी राज्य सरकारों मे एक साथ लागू किया था। ताकी जनता सरकारी विभागों से सूचना प्राप्त कर संबन्धित विभाग मे हो रहें भ्रष्टाचार व कमियों कों उजागर कर सके। परन्तु जहां रक्षक ही भक्षक बने हो वहां कौन क्या कर सकता है यह बातें आज हिंदुस्तान शिवसेना के राष्ट्रीय प्रमुख और दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट राजेन्द्रसिंह तोमर राजा भईया ने कही। राजा भईया ने बताया कि गंगापुर सिटी नगर परिषद के लोक सूचना अधिकारी के पास कुछ सूचनाएं प्राप्त करने के लिये उन्होंने फरवरी और मार्च में दो आरटीआई आवेदन लगाए थे। एक अन्य आवेदन जिला कलेक्टर के माध्यम से भी लगया था।

जिसे भी सूचना देने हेतु लोक सूचना अधिकारी नगर परिषद के पास भेज दिया था। परन्तु समय पूरा होने के तीस दिनों बाद भी भ्रष्टाचार और अपनी कमियों को छुपाने के लिए उन्हें लोकसूचना अधिकारी नगर परिषद गंगापुर सिटी ने कोई सूचना नहीं दी। जिस पर उन्होंने 22 मार्च को सभापति नगर परिषद गंगापुर सिटी के यहां प्रथम अपील दायर की परन्तु उन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। इससे ये साफ जाहिर होता है कि नगर परिषद के संबन्धित अधिकारी व सभापति इस एक्ट का खुला उलंघन कर गैर जिम्मेदाराना कार्य करते हुए नियमों कि धज्जियां उड़ा रहें हैं। साथ ही जानबूझ कर मांगी गई सूचनाएं ना देकर नगर परिषद मे चल रहें गोलमाल को छुपा रहें है। इसके लिए राजा भईया ने ऐसे संबन्धित अधिकारियों व कर्मचारीयों को चिन्हित कर उनके खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्यवाही करने के लिए भरतपुर के डिवीजनल कमिश्नर और जिला कलेक्टर को लिखित शिकायतें की हैं।
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