जिले के बौंली पंचायत समिति के मित्रपुरा उप तहसील का समीपवर्ती कुटका गांव आजादी के 70 वर्ष बाद भी उबड़ खाबड़ रास्तों से आज भी आजाद नहीं हुआ है। जो लोकतंत्र में जिम्मेदार राजनेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बड़े शर्म की बात है।
गांव की करीब 3000 की आबादी इसी मुख्य रास्ते से एवं जुड़ने वाले दर्जनों गांव की जनता इसी उबड़ खाबड़ रास्ते का उपयोग करते हैं। वे सभी जिम्मेदार पदों पर रहते हुए ऐसी विकट समस्या की उपेक्षा करने वाले जिम्मेदार लोगों से सवाल करते हैं कि हमारा क्या कसूर था कि हमें आज भी ऐसी विकट समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

कई बार ग्रामीणों ने सामाजिक संगठनों एवं अपने स्तर पर एसडीएम, जिला कलेक्टर उप मुख्यमंत्री सहित विधायक सांसदों को भी अवगत कराया लेकिन आज भी समस्या जस की तस है। ग्रामीणों का कहना है कि हमारे आजीविका का मुख्य स्त्रोत खेती होने के कारण उसके लिए हमें रोज समीपवर्ती उप तहसील मुख्यालय मित्रपुरा कस्बे में जाना पड़ता है जिसके लिए इसी रास्ते से निकलना पड़ता है। कुटका से कुशलपुरा के बीच करीब 5 किलोमीटर रोड़ नहीं होने से गर्मी बरसात में बहुत ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वही खराब रास्ते एव रोड़ के अभाव में बच्चियों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। इसी रास्ते कुटका गांव में एक बड़ा नाला होने से बरसात के दिनों में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से चौपट हो जाती है। बरसात के दिनों में किसी की मौत हो जाने पर कई बार व्यक्ति को शमशान घाट तक नहीं पहुंचाया जा सकता है जिसके लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है जो कि बड़े दुर्भाग्य की बात है। रास्ते खराब होने के कारण दुपहिया वाहनों से लोगों के फिसल कर गिर जाने से कई लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि समय रहते यदि रोड़ नहीं बनवाया गया तो मजबूर होकर बड़े स्तर पर आंदोलन करना पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों की होगी।
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