सवाई माधोपुर: डूंगरी बांध परियोजना के खिलाफ चल रहे आं*दोलन ने सोमवार को और जोर पकड़ लिया। संघर्ष समिति और प्रभावित गांवों के पंच-पटेलों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक स्तर पर हो रही कथित अ*वैध कार्रवाइयों पर कड़ा एतराज जताया। जानकारी के अनुसार, तहसीलदार खंडार द्वारा भूरी पहाड़ी, डूंगरी, तालडा, बसों खुर्द सहित कई गांवों की भूमि के नक्शे और ट्रेस सीधे ईआरसीपी को भेजने की बात सामने आई थी।
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जैसे ही यह मामला ग्रामीणों के संज्ञान में आया, लोग आक्रोशित हो उठे और सोमवार दोपहर 12 बजे महावीर पार्क में एकत्रित होकर नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की। इसमें पूर्व विधायक मोतीलाल मीणा, कमलेश पटेल (डूंगरी), कालूराम पटेल भूरीपहाड़ी, महेश मीणा, खल्लाक खान, मुकेश भूप्रेमी, अमर सिंह मीणा, मुकेश मीणा सरपंच, पिंटू चेची सरपंच, बीसी पढ़ाना, सीताराम सरपंच, घमंडी सरपंच, रामनिवास सरपंच, प्रहलाद मीणा, हनुमान पटेल सहित विभिन्न गांवों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से साफ शब्दों में कहा कि यदि इस परियोजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त नहीं किया गया तो जिले में बड़ा व्यापक आं*दोलन होगा, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं और जनहानि तक की नौबत आ सकती है। इस दौरान संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन को 100 से अधिक पन्नों के विभिन्न दस्तावेज सहित ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी किसान की जमीन से संबंधित दस्तावेज, नक्शा या ट्रेस सरकारी कार्यालयों में भेजे गए, तो गांववाले इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि कोई पटवारी या राजस्वकर्मी जबरन सर्वे करेगा या किसानों के दस्तावेज ले जाएगा, तो ग्रामीण सख्त कदम उठाने पर मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामवासियों ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया कि 31 अगस्त को चकेरी गांव में विशाल महापंचायत होगी। यदि इस बीच सरकार ने कोई मनमानी या सर्वे की कार्यवाही की, तो महापंचायत के माध्यम से आं*दोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। जिला कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि इस मामले को सरकार तक गंभीरता से पहुंचाया जाएगा और जिले में किसी भी प्रकार की अशांति या जनहानि की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।
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