विश्व बाघ दिवस पर भारत की सबसे प्रतिष्ठित बाघिन को आधिकारिक श्रद्धांजलि
सवाई माधोपुर: विश्व बाघ दिवस (World Tiger Day) अवसर पर वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने मंगलवार को सवाईमाधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) की गौरवशाली और विश्वविख्यात बाघिन “मछली (टी-16)” को चिरस्थायी स्मृति देने हेतु जोगी महल गेट रणथंभौर पर भव्य स्मारक का अनावरण किया गया। वन राज्यमंत्री शर्मा ने सवाई माधोपुर जिलेवासियों को विश्व टाइगर दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore National Park) सवाई माधोपुर की पहचान है तथा इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है।
उन्होंने कहा कि रण्थम्भौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र को आबाद करने में बाघिन मछली (टी-16) (Tigress Machli) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि देश में टाइगर का यह द्वितीय स्मारक है। वन विभाग की ओर से यह स्मारक बाघिन मछली (टी-16) को सच्ची श्रद्धांजलि है। शावकों के साथ यह स्मारक, न केवल उसकी महान विरासत को जीवंत करता है, बल्कि रणथंभौर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों एवं त्रिनेत्र गणेश मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए वन्यजीव संरक्षण की एक प्रेरणास्पद झलक भी प्रस्तुत करेगा।
रणथंभौर की सबसे प्रसिद्ध बाघिन मछली (टी-16) का जन्म, 1997 में हुआ। वह अपने चेहरे पर मछली जैसी आकृति के कारण यह नाम पाई और वर्षों तक पदम तालाब, राजबाग और मलिक तालाब जैसे झीलों वाले क्षेत्र पर नियंत्रण रखने के कारण “लेडी ऑफ द लेक्स” एवं एक विशाल मगरमच्छ को परास्त कर “क्रोकोडाइल किलर” भी कहलाई। मछली ने 5 बार शावकों को जन्म दिया और 2004-05 के शिकार संकट के समय रणथंभौर को पुनः आबाद किया। रणथंभौर की वर्तमान बाघ आबादी का एक बड़ा हिस्सा मछली के वंशजों से बना है, जिनमें सुंदरी (टी-17) और ऐरोहेड (टी-84) जैसे नाम शामिल हैं।
मछली की ही संतान बाघिन एसटी-2 राजमाता ने अलवर के सरिस्का को आबाद किया। 2016 में लगभग 19 वर्षों की आयु में मछली का दे*हांत हुआ, जो किसी जंगली बाघिन के लिए अभूतपूर्व आयु मानी जाती है। बाघिन मछली के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री “The World’s Most Famous Tiger” को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने मछली पर स्मारक डाक टिकट जारी कर उसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंतर्गत 107 नवचयनित वन्यजीव गाइड्स को प्रशिक्षण समापन प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। वन्यजीव गाइड खुश बैरवा (विस्थापन श्रेणी) और उमेश सैनी (ईडीसी श्रेणी) को रणथंभौर संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान हेतु सम्मानित किया गया।
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