चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत लगे कार्मिक नियमिती करण सहित 8 सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। खासकर, प्रबंधकीय कार्यालय मंगलवार को पूरी तरह सूने दिखाई दिए।

इस दौरान अधिकारी कार्मिकों को डराने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे है। ऐसे में कार्मिकों में रोष पैदा हो रहा है।
जिला अध्यक्ष राजस्थान एनएचएम प्रबंधकीय संविदा कार्मिक संघ, शाखा सवाई माधोपुर ने बताया कि राजस्थान सरकार ने मार्च 2012 में एनआरएचएम के संविदा पदों को नियमित करने की घोषणा की थी तथा वर्तमान सरकार ने भी एनएचएम में कार्यरत सभी सविंदा कार्मिको को नियमित करने एवं समस्या समाधान करने की बात अपने घोषणा पत्र में की। लेकिन अभी तक इस पर गंभीरता से गौर नहीं किया गया। राज्य सरकार के जन घोषणा पत्र में किए गए वादे अनुसार एनएचएम संविदा कार्मिकों को नियमित किया जाए। वहीं एनएचएम के अंतर्गत वर्ष 2017-18 से स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पॉलिसी लागु किया जाए। संविदा कार्मिकों के वेतन विसंगति दूर की जाए ताकि अल्पवेतन भोगी कार्मिकों को राहत मिले। एनएचएम मे कार्यरत सभी कार्मिको को मेडिक्लेम पॉलिसी मे कवर किया जाए जिसके लिए भारत सरकार के द्वारा राशि स्वीकृति की जा चुकी है। इसके साथ ही एनएचएम कार्मिकों पर झुंझुनू में दर्ज मुकदमें वापिस लिए जाएं। वहीं एजेंसी के मार्फत लगे कार्मिकों को सीधा विभाग में जोड़ा जाए।
एनएचएम कार्मिकों के अवकाश पर जाने से स्वाईन फ्लू, टीबी कार्यक्रम, मौसमी बीमारियां, तंबाकू सेल, एनसीडी सेल, शहरी स्वास्थ्य मिशन, आशा कार्यक्रम, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, आयुष सहित जिलास्तर से लेकर ब्लॉक एवं पीएचसी स्तर की स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही हर तरह की रिपोर्टिंग पूर्णतः ठप हो गई। सामूहिक अवकाश के चलते स्वास्थ्य विभाग की बैठकें व प्रशिक्षण रद्द हो गए। जिले के कार्मिकों ने सीएमएचओ डॉ. तेजराम मीना को 25 फरवरी को अपना ज्ञापन सौंपा था।