नई दिल्ली: कई दशकों तक भारतीय वायुसेना की अग्रिम रक्षा पंक्ति में रहने वाले रूस से खरीदे गए मिग-21 लड़ाकू विमानों को आज डी-कमीशन कर दिया गया। विदाई समारोह चंडीगढ़ में आयोजित हुआ, जहां वायु सेना के पायलट इन विमानों को अंतिम बार उड़ा रहे हैं। समारोह में मौजूद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मिग 21 महज एक विमान नहीं है बल्कि यह भारत-रूस संबंधों का प्रमाण है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज जब हम मिग-21 को इसकी ऑपरेशनल जर्नी से विदाई दे रहे हैं तो मुझे लगता है हम एक ऐसे अध्याय को विदा करने जा रहे हैं जो न केवल भारतीय वायुसेना के इतिहास में बल्कि हमारी पूरी सैन्य उड्डयन की जर्नी में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा। मिग-21 विमानों को 1963 में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था और 63 वर्षों की सेवा के बाद आज इन्हें सेवामुक्त किया जा रहा है।
एक पूर्व इंजीनियर जीवन कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से मिग-21 की खासियत बयां करते हुए कहा कि इसकी खासियत है 90 डिग्री पर सीधे क्लाइंब करने की क्षमता, आज आपने यह करतब देखा होगा। यह दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक है। इसका कोई मुकाबला नहीं। हमने इसकी उम्र की वजह से इसे अंतिम विदाई दी, लेकिन इसकी कमी कोई पूरा नहीं कर सकता। हम उम्मीद करते हैं कि तेजस इसकी जगह लेगा।
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