सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया की सवाई माधोपुर जिला कमेटी की ओर से सीबीआई कोर्ट लखनऊ द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस के मामले में दिए गए फैसले पर असहमति जताते हुए एक विरोध प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष शहाबुद्दीन अहमद राईन ने बताया कि सभी पार्टी कार्यकर्ता जामा मस्जिद शहर पर जमा हुए और नारे बाजी कर विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि सीबीआई कोर्ट ने सभी गवाह और सबूतों को नकारते हुए पक्षपात पूर्ण रवैया अपना कर यह फैसला सुनाया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 9 अप्रेल 2019 को बाबरी मस्जिद विवाद पर राममंदिर के हक दिए फैसले पर स्पष्ट कहा गया था कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस गैर लोकतांत्रिक तरीके से किया गया था, जो कि एक आपराधिक कृत्य है। लेकिन सीबीआई कोर्ट लखनऊ द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय की उपरोक्त टिप्पणी को दरकिनार करते हुए उन सभी आरोपियों को बरी करना भारतीय न्यायपालिका का अपमान है। यह एक लोकतांत्रिक निर्णय न होकर पूरी तरह से राजनैतिक प्रभाव में दिया गया निर्णय है। चूंकि जिस प्रकार से वीडियो को साक्ष्य न मानकर फैसला किया गया और उसके बाद आरोपियों के न्यूज चैनल्स में बाबरी विध्वंस में शामिल होने के बयान आ रहे हैं जिसमें उनकी स्वीकारोक्ति है।

एसडीपीआई ने इस निर्णय के विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी से जुड़े संघटनों को सर्वोच्च न्यायालय में इस राजनैतिक फैसले के विरोध में अपील किये जाने का समर्थन किया है और उम्मीद जताई कि सर्वोच्च न्यायालय जरूर इस निर्णय पर विचार कर आरोपियों को दंडित करेगा।
प्रदर्शन के इस मौके पर एसडीपीआई जिला महासचिव रईस अहमद जैदी, विधान सभा अध्यक्ष उस्मान खान, जिला कमेटी मेंबर अतीक अहमद, विधान सभा उपाध्यक्ष फिरोज खान, विधान सभा महासचिव शाकिर राईन सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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