कोटा: कोटा (Kota) के गुमानपुरा इलाके में गुरुवार सुबह पुलिस की बड़ी चूक सामने आई। छबड़ा थाना पुलिस 18 साल पुराने ह*त्या के मामले के फरार आरोपी की तलाश में सब्जी मंडी पहुंची थी, लेकिन गफलत में बारां डिस्कॉम के सीनियर अकाउंटेंट प्रदीप अग्रवाल को ही पकड़ लिया। प्रदीप अग्रवाल सुबह करीब 8 बजे सब्जी लेने मंडी पहुंचे थे। इसी दौरान सादा वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। टीम में केवल एक एएसआई वर्दी में था, बाकी पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में थे। प्रदीप का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बिना कुछ बताए उन्हें घेर लिया, आईडी मांगी और जेब से पर्स निकाल लिया।
उन्हें लगा कि ब*दमाश लू*टपाट कर रहे हैं, इसलिए वह वहां से निकलने लगे। इसके बाद प्रदीप खुद शिकायत करने गुमानपुरा थाने पहुंचे, लेकिन वहां भी उनकी बात नहीं सुनी गई। उल्टा पुलिस ने उन्हें शांतिभंग के आरोप में लॉकअप में डाल दिया। वह करीब चार घंटे तक हवालात में रहे। दोपहर में किसी दूसरे के मोबाइल से उन्होंने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद परिवार थाने पहुंचा और जमानत करवाई। मामले की जानकारी मिलने पर विधायक संदीप शर्मा ने कड़ा विरोध जताया और एसपी तेजस्वनी गौतम से बात कर पूरे मामले की जांच की मांग की है।
छबड़ा थाना एएसआई रोडमल का कहना है कि ह*त्या के एक फरार आरोपी की लोकेशन मंडी इलाके में मिली थी। आरोपी का हुलिया प्रदीप अग्रवाल से मिलता था और उनकी गाड़ी पर नंबर प्लेट भी नहीं थी, इसलिए उन्हें रोकने की कोशिश की गई। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान प्रदीप ने अभद्रता की और स्कूटर से टक्कर मा*र दी। वहीं, गुमानपुरा थाना अधिकारी महेश कारवाल ने बताया कि प्रदीप अग्रवाल को पुलिस से अभद्रता और शांति भंग करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इधर, कोटा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत सिंह ने कहा कि पुलिस को किसी व्यक्ति को पकड़ने से पहले स्पष्ट बताना चाहिए कि उसे किस मामले में रोका जा रहा है। उन्होंने शांतिभंग की धाराओं के गलत इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।
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