नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की एक बेंच ने अपने एक आदेश में सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वो आवारा कुत्तों और मवेशियों को हाईवे, सड़कों और एक्सप्रेस-वे से हटा दें। हालांकि कोर्ट का लिखित आदेश अभी जारी नहीं हुआ है। कोर्ट ने अपने मौखिक आदेश में कहा कि इसका सख्ती से पालन करना जरूरी है वरना वो अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराएगा।
कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया कि वे सरकारी और निजी संस्थानों की पहचान करें, जिनमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक खेल परिसर, रेलवे स्टेशन शामिल हैं। उन्हें इस तरह घेर दें कि आवारा कुत्ते अंदर न आ सकें। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को ऐसे परिसरों से मौजूदा आवारा कुत्तों को हटाकर उनकी नसबंदी करानी होगी। इसके बाद उन्हें डॉग शेल्टर में भेजना होगा। कुछ वकीलों ने आदेश पर चिंता जताई और कोर्ट से इसे संशोधित करने के लिए सुनवाई की मांग की।
हालांकि बेंच से इसे खारिज कर दिया। पहले दो जजों की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम्स में बंद करने का आदेश दिया था। जिसके बाद डॉग लवर्स की याचिका पर तीन जजों की बेंच ने निर्देश दिया कि जिन कुत्तों को पकड़ा गया है, उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाए। हालांकि, जिन कुत्तों को रेबीज है या रेबीज होने का संदेह है, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। इसी मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई डॉग लवर्स और पशु अधिकार कार्यकर्ता जुटे थे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई थी।
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