रणथंभौर के बिट अल्लापुर नाका गुढ़ा में वन क्षेत्र विंध्याकरा खाड़ में 20 दिसंबर 2022 को एक बाघ लेटा हुआ पाया गया। जिसकी पहचान टी-57 के रूप में हुई। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीपी मीना को बाघ का अवलोकन करवाया गया। बाघ अत्यधिक कमजोर, भूखा प्रतीत हुआ। आगे के पैर में घाव देखा गया। इसके शरीर में आंतरिक चोट या घाव हो सकते है जिसके इलाज की प्रक्रिया हेतु 21 दिसंबर को बाघ ट्रैंक्यूलाइज कर पशुचिकित्सकीय उपचार कर रेस्क्यू पिंजरे में रखा गया तथा दो दिन ऑब्जरवेशन में रखने के बाद बाघ की टैरीटेरी क्षेत्र में रिलीज किया गया है। 20 दिसंबर 2022 से बीमार हालत में मिले इस बाघ टी-57 को पशु चिकित्सकीय उपचार कर देखरेख में रखा जाकर मॉनिटरिंग की जा रही है।

समय-समय पर पशु चिकित्साधिकारी को इसके स्वास्थ्य का निरीक्षण करवाया जाकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। गत 3 जनवरी को सायं काल करीब 7:30 बजे इसकी टैरीटेरी में पुन: टी 123 का मुवमेंट पाया गया। जिससे इसकी सुरक्षा बढ़ाकर फाइटिंग की संभावना को रोकने का प्रयास किया गया जिसमें सफलता मिली है। बाघ टी 57 का मुवमेंट एक ही क्षेत्र में 100-150 मीटर दूरी तक ही हो पा रहा है इसकी तबीयत अस्थिर बनी हुई है। तबीयत ज्यादा खराब होने के चलते किसी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है। गत 4 जनवरी को डॉ. सीपी मीना के द्वारा निरीक्षण करने पर पाया गया की बाघ को दोबारा ट्रैंक्यूलाइज नहीं किया जा सकता है और इलाज मौके पर ही किया जाए तो बेहतर है। टी-123 का मूवमेंट भी आसपास बना हुआ है।
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