रणथम्भौर जो कि अपने बाघ संरक्षण, संवर्द्धन के लिए विश्वविख्यात है। प्रशासन की लापरवाही के कारण आज बाघों की असुरक्षा का पर्याय बन गया है। पिछले दिनों रणथम्भौर नेशनल पार्क के 116 बाघों के संबंध में गोपनीय रिपोर्ट बनाई गई, जिसमें 26 बाघों के गायब होने की खबर ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा आघात पहुंचाया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की सदस्या दिया कुमारी ने वन्यजीवों और बाघों की इस दुर्दशा पर प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वन्यजीव हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग है और राष्ट्रीय पशु बाघ की सुरक्षा हमारे प्रशासन के लिए सक्रियता और क्रियाशीलता का परिचायक होती है। इसके बावजूद रणथम्भौर में इस तरह बाघों का गायब होना और वन्यजीवों का शिकार किया जाना सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। प्रशासन की उदासीनता के कारण शिकारियों का इस तरह बैखोफ घुमना उनके हौंसलों को बढ़ा रहा है, जिस पर अंकुश लगाया जाना अत्यन्त आवश्यक है।

सांसद दिया कुमारी ने कहा कि जब वे सवाई माधोपुर से विधायक थी उस समय उन्होंने रणथम्भौर नेशनल पार्क में बाघों के संरक्षण के लिए हर सम्भव प्रयास किये किन्तु वर्तमान में प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही रणथम्भौर में बाघों व वन्यजीवों के जीवन पर संकट का सबब बन गई है। ऐसे में दिया कुमारी ने सरकार और प्रशासन से अपेक्षा करी, कि वे अपनी गरिमा को कायम रखने के लिए और रणथम्भौर नेशनल पार्क में बाघों को पूर्व स्थिति में लाने के लिए तुरन्त हरकत में आए और शिकारियों को पकड़कर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करें ताकि इस तरह की पुनर्रावृति नहीं हो, वहीं लापता हुए बाघों का जल्द से जल्द पता लगाया जाए।
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