नई दिल्ली: भारत सरकार ने शुक्रवार को कहा कि इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 लोगों को अधिक सक्षम बनाते हैं। सरकार के अनुसार ये डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फ*र्जी, गलत और भ्रा*मक सामग्री को रोकने को लेकर कड़ी जिम्मेदारी तय करते हैं। यह स्पष्टीकरण राज्यसभा में सूचना प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉक्टर एल मुरुगन ने दी।
मंत्री ने कहा कि जहां एक ओर संविधान का अनुच्छेद 19 (1) अभिव्यक्ति की आजादी देता है, तो वहीं दूसरी ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती गलत जानकारी की समस्या को देखते हुए रेग्युलेटरी एक्शन्स की जरूरत महसूस की गई है। पीआईबी के प्रेस रिलीज के अनुसार साल 2000 के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत 25 फरवरी 2021 को अधिसूचित आईटी नियमों में सोशल मीडिया मध्यस्थों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है। फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आईटी नियमों के पार्ट-II के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि वे गलत, भ्रा*मक या फर्जी जानकारी के प्रसार को रोकेंगे।
प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सामग्री पर कार्रवाई करनी होगी और उपयोगकर्ताओं के लिए शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था भी उपलब्ध करानी होगी। सरकार ने पीआईबी के फैक्ट चेक यूनिट की भूमिका का भी जिक्र किया है, जिसे नवंबर 2019 में केंद्र सरकार से संबंधित फ*र्जी खबरों की पहचान और सत्यापन के लिए बनाया था। यह यूनिट संबंधित मंत्रालयों और विभागों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनलों पर प्रकाशित या प्रसारित फैक्ट्स के संबंध में जानकारी देता है कि यह सही है या गलत।
इसके लिए सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत उन वेबसाइटों, सोशल मीडिया अकाउंट्स या पोस्ट्स को ब्लॉक करने के अधिकार का इस्तेमाल करती है जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, रक्षा, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करते हैं। डॉक्टर मुरुगन ने यह जानकारी राज्यसभा में डॉक्टर लक्ष्मीकांत बाजपेयी के एक सवाल के जवाब में दी। लक्ष्मीकांत बाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।
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