नई दिल्ली: पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने भ्रष्टाचार निरोधक संस्था लोकपाल की सात बीएमडब्ल्यू कार खरीद को लेकर सवाल उठाए हैं। चिदंबरम ने अपने एक्स पर लिखा है कि जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को सामान्य सेडान वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं, तो लोकपाल अध्यक्ष और छह सदस्यों को बीएमडब्ल्यू कारों की क्या जरूरत है? सार्वजनिक धन से इतनी महंगी गाड़ियां खरीदने का क्या तुक है? आशा है कि लोकपाल के कम से कम एक या दो सदस्य इन गाड़ियों को स्वीकार करने से इंकार करेंगे।
नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने एक्स पर लिखा है कि लोकपाल को यह टेंडर रद्द कर देना चाहिए और मेक इन इंडिया इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना चाहिए। लोकपाल ने सात बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज 330एलआई एम स्पोर्ट कारों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया है। 16 अक्टूबर को जारी टेंडर में कहा गया है कि ये सभी कारें लॉन्ग व्हीलबेस और सफेद रंग की होंगी। दस्तावेज के अनुसार इसके लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख 6 नवंबर तय की गई है, जबकि टेंडर 7 नवंबर को खोली जाएंगी।
कारों की आपूर्ति दो सप्ताह या सप्लाई ऑर्डर जारी होने के 30 दिन के अंदर करनी होगी। सात सदस्यीय लोकपाल संस्था की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएम खानविलकर कर रहे हैं। संस्था का काम केंद्र और उससे जुड़ी एजेंसियों में भ्रष्टाचार के मामलों की निगरानी और जांच करना है।
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