अक्षय तृतीया, पीपल पूर्णिमा एवं अन्य अवसरों पर होने वाले बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 16 के अन्तर्गत राज्य सरकार के द्वारा प्रत्येक उपखण्ड स्तर पर संबंधित उपखण्ड अधिकारी/तहसीलदार को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है। अधिनियम की धारा 16(3) में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के कर्तव्य निर्धारित कर पालना के निर्देश दिए है।

जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट नन्नूमल पहाडिया ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे बाल विवाहों के अनुष्ठापन का निवारण करें। उन्होंने उपखण्ड अधिकारी/तहसीलदार अपने उपखण्ड/तहसील में संबंधित थानाधिकारी, शिक्षा विभाग के अध्यापकों, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, पटवारी, ग्राम सेवक, आंगनबाडी कार्यकर्ताओं के माध्यम से बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत प्रभावी कार्यवाही करें। जिला कलेक्टर ने उपखंड अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम के लिए सम्पूर्ण देश एवं राज्य में लॉकडाउन प्रभावी है। जिले में वर्तमान में धारा 144 एवं लॉकडाउन का पालन किया जाना आवश्यक है। साथ ही जिले के उपखण्ड क्षेत्र गंगापुर सिटी एवं बामनवास में कोरोना वायरस के संक्रमित व्यक्ति पाये जाने से संबंधित क्षेत्र में जीरो-मोबिलिटी लागू है। विशेष परिस्थितियों में विवाह की अनुमति के लिए संबंधित व्यक्ति आवेदन संबंधित उपखण्ड क्षेत्र के उपखण्ड कार्यालय में करेगा तथा उपखण्ड अधिकारी विवाह के आवेदन पर अपनी रिपोर्ट/टिप्पणी कर कार्यालय कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सवाई माधोपुर में प्रेषित करेंगे। कार्यालय कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सवाई माधोपुर द्वारा जारी अनुमति प्राप्त विवाह में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा जारी मेडिकल एडवाईजरी की पालना सुनिश्चित करवायी जाये। संबंधित उपखण्ड अधिकारी (बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी) को निर्देशित किया है कि वे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की पालना करना सुनिश्चित करवाये।
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