जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चन्द्रप्रभु का मोक्ष कल्याणक महोत्सव सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर परिशद क्षेत्र के जिनालयों में श्रद्धा की झलक के साथ ही जिनेन्द्र देव के अभिशेक, शांतिधारा व निर्वाण लड्डू चढाने की धूम रही।
समाज के प्रवक्ता प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि दिगम्बर जैन नेमिनाथ अतिशय क्षेत्र दीवानजी की नसिया आलनपुर में महोत्सव का शुभारम्भ पं. उमेश जैन शास्त्री के निर्देशन में सुबह जिनेन्द्र देव के किए गए अभिषेक के साथ हुआ। विश्व की सुख-समृद्धि व कामना के साथ मंत्रोच्चारों के बीच शांतिधारा कर जिनेन्द्र देव के चरणों में प्रभावित की गई। श्रावक-श्राविकाओं ने देव-शास्त्र-गुरू की पूजन के साथ भगवान चन्द्रप्रभु की अष्टद्रव्यों से पूजन कर पंच कल्याणक के चार अर्ध्य चढ़ाने के बाद निर्वाण कांड का सामूहिक उच्चारण करते हुए हाथों में अर्ध्य, दीपक, श्रीफल लेकर मोक्ष के प्रतीक स्वरूप मोदक (निर्वाण लड्डू) प्रभु चरणों में अर्पण किये।.
पूजन के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा सिलसिलेवार दी गई भजनों की मनभावन प्रस्तुतियों पर इन्द्र-इन्द्राणियों ने भक्ति नृत्य कर जिनेन्द्र देव को खूब रिझाया। महाअर्ध्य समर्पण, शांतिपाठ एवं विसर्जन विधि के साथ पूजन सम्पन्न हुई। पूजन के उपरांत जिनेन्द्र देव की मंगल आरती उतारी और भगवान चन्द्रप्रभु का गुणगान कर पुण्य का संचय किया।
इस अवसर पर शहर स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में ससंघ विराजित आर्यिका 105 चिन्मयमति माताजी ने धर्म चर्चा के दौरान भगवान चन्द्रप्रभु के जीवन चरित्र को आत्मसात करने पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति को राग, द्वेश छोड़कर अपनी आत्मा का चिंतन करना चाहिए तब ही मनुष्य का कल्याण हो सकता है। उन्होंने लोगों को धर्म की राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सम्यक् दर्शन के बिना मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता।
जैन ने बताया कि सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा आर्यिका संघ के सानिध्य में 14 से 21 मार्च तक अष्टान्हिका पर्व विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जावेगा। इस 8 दिवसीय पर्व के दौरान जिला मुख्यालय स्थित जिनालयों में नंदीश्वरद्वीप, पंचमेरू की विशेश रुप से पूजा-आराधना, जाप, पाठ, शास्त्र सभा आदि विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।