सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर जिले की टोडरा उपतहसील इन दिनों बंदरों के आ*तंक से थर्रा रही है। बढ़ती बंदर आबादी और उनके आक्रामक व्यवहार ने पूरे इलाके का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बंदर न सिर्फ घरों में घुसकर रसोई का सामान लूट रहे हैं, बल्कि खेतों की फसलों को भी तबाह कर रहे हैं। शुक्रवार शाम को एक 6 वर्षीय मासूम बच्चे पर हुए उनके ह*मले ने ग्रामीणों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
घटना का विवरण:
शुक्रवार शाम घर की छत पर खेल रहे नितेश गुर्जर (6 वर्ष) पर अचानक बंदरों के झुंड ने ह*मला बोल दिया। बच्चे के साथ खेल रहे अन्य बच्चे डर के मा*रे भाग खड़े हुए। बंदरों ने नन्हें नितेश को घेर लिया और उसके शरीर पर खरोंचें मा*र दीं। परिजनों ने किसी तरह पास रखा पानी का कैंपन फेंककर बच्चे को बंदरों की चंगुल से छुड़ाया। गनीमत रही कि बच्चे की जान बच गई, वरना हादसा बहुत गंभीर हो सकता था। स्थानीय निवासी बच्चू सिंह गुर्जर ने बताया की बंदर अब दिन-दहाड़े घरों में घुस रहे हैं। बच्चा छत पर खेल रहा था, अचानक झुंड आ गया। अगर समय पर कैंपन न फेंका होता तो कुछ भी हो सकता था।
पहले भी हो चुकी है गंभीर घटना:
यह पहली घटना नहीं है। कुछ महीने पहले आर. क्वार्टर कॉलोनी में एक बुजुर्ग महिला पर बंदर ने पीछे से ह*मला किया था। महिला संतुलन खोकर गिर पड़ीं और उनके सिर में गंभीर चोट आई। वह घटना आज भी ग्रामीणों को डराती है। बाजार और घरों में भी आतं*क
उपतहसील बाजार में सब्जी विक्रेता बुद्धि साहू और रामबाबू ने बताया कि बंदर रोज उनके ठेलों से फल-सब्जियां उठा ले जाते हैं।
ग्राहक अब ठेलों के पास आने से कतराने लगे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। महिलाओं की चिंता और बढ़ गई है। वे बताती हैं कि बंदर इतने शातिर हो गए हैं कि दरवाजा खुला देखते ही रसोई में घुस जाते हैं। फ्रिज खोलकर सामान निकालना, सूखते कपड़ों को फाड़ना अब आम बात हो गई है। सुबह-शाम बंदरों के झुंड इतने घने हो जाते हैं कि बच्चों का स्कूल जाना भी मुश्किल हो गया है।
प्रशासन पर गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी:
ग्रामीणों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर कई बार वन विभाग और प्रशासन को लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन मिले हैं। अब ग्रामीण सख्त हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही बंदरों को पकड़कर सुरक्षित जंगल में नहीं छोड़ा गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
यह समस्या अब टोडरा के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, वरना छोटी-छोटी घटनाएं बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती हैं।