आज के दिन 12 अक्टूबर 2005 को देश में सूचना का अधिकार कानून लागू हुआ था। इसी परिपेक्ष में रणथंभौर रोड़ स्थित पथिक लोक सेवा समिति कार्यालय पर सूचना के अधिकार पर जागरूकता हेतु एक संगोष्टी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता सामाजिक कार्यकर्ता हरिप्रसाद योगी एडवोकेट ने बताया कि प्रत्येक नागरिकों को किसी भी सरकारी विभागों से उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों और योजनाओं आदी समस्त बजट खर्च की जानकारी मांगने का अधिकार है।
इसके लिए प्रत्येक सरकारी विभागों के बाहर सूचना के अधिकार के बारे में बोर्ड लगाना अनिवार्य है। जिसमें विभाग में कौन लोक सूचना अधिकारी है उनके मोबाइल नंबर आदी जानकारी देना आवश्यक है एवं कोई भी आवेदक सूचना के अधिकार के अंतर्गत सूचना मांगता है तो उससे कोई सवाल जवाब नहीं किया जाएगा।

योगी ने बताया कि तीस दिन में सूचना नहीं देने पर निः शुल्क सूचना उपलब्ध कराई जाएगी नहीं तो प्रथम अपील उसी विभाग के उच्च अधिकारियों के पास करे। जंहा से सूचना नहीं देने पर दूसरी अपील राज्य सूचना आयोग एवं केंद्र सरकार से संबंधित तो केंद्रीय सूचना आयोग को करनी चाहिए। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का जनता के लिए जनता द्वारा शासन की परिकल्पना जब ही सार्थक होगी जब हम सरकारी व्यवस्था और समस्त कार्यों की निगरानी रखे और इसके सूचना का अधिकार कानून एक बेहतरीन कारगर हथियार है।
इस अवसर पर पथिक लोक सेवा समिति सचिव मुकेश सीट ने बताया कि सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा आदी योजनाओं की निगरानी सूचना के अधिकार के माध्यम से लेनी चाहिए। इसके लिए जागरूक होने की आवश्यकता है। इस अवसर विजेंद्र सैनी, भगवान सैनी, अविश शर्मा, सुरेन्द्र मीणा, दिलकुश सैनी, दीपक आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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