सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) के रेलवे अंडरपासों (Railway underpasses) में इंजीनियरिंग (Engineering) और ड्रेनेज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई स्थानों पर बने या निर्माणाधीन अंडरपास में बारिश का पानी (Rain Water) भरने की समस्या सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई, जिससे हर मानसून (Monsoon) में आमजन को परेशानी झेलनी पड़ती है।

एड. हरिप्रसाद योगी द्वारा दी गई जानकारी और खेरदा क्षेत्र के अंडरपास की सामने आई तस्वीर में भी अंडरपास के भीतर पानी जमा होने की स्थिति दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश (Rain) के बाद पानी भर जाने से दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। कई बार लोग बीच रास्ते से वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
इतना ही नहीं, शहर में पहले से बनी सीसी सड़कों पर भी नई और ऊंची सीसी सड़कें बना दी गईं, लेकिन कई जगह जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बरसात के दौरान पानी सड़कों पर ही जमा हो जाता है। इससे आवागमन प्रभावित होने के साथ-साथ आसपास के घरों और दुकानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अंडरपास के निर्माण में वर्षा जल निकासी (ड्रेनेज), ढाल (ग्रेडिएंट) और आवश्यकता पड़ने पर पंपिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं। इनकी कमी होने पर जलभराव की समस्या लगातार बनी रह सकती है। शहर के लिए पूर्व में तैयार तकनीकी दस्तावेजों में भी जल निकासी और कुछ क्षेत्रों में जलभराव की चुनौती का उल्लेख किया गया है।
अब उठ रहे प्रमुख सवाल:
क्या अंडरपास निर्माण से पहले ड्रेनेज का समुचित डिजाइन तैयार किया गया?
यदि किया गया, तो पानी भरने की नौबत क्यों आ रही है?
क्या संबंधित विभाग स्थायी समाधान के लिए पंपिंग सिस्टम या अतिरिक्त जल निकासी व्यवस्था विकसित करेगा?
क्या मानसून के दौरान ऐसे अंडरपासों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा?
विकल्प टाइम्स (Vikalp Times) इस मुद्दे पर संबंधित विभाग और रेलवे अधिकारियों का पक्ष भी प्रकाशित करेगा।
यदि आपके क्षेत्र में भी किसी अंडरपास या सड़क पर जलभराव की समस्या है, तो फोटो और जानकारी हमारे साथ साझा करें।
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