सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) जिले में विकास कार्यों और अन्य कारणों से लगातार हो रही पेड़ों की कटाई (Cutting of Trees) के बीच सूचना के अधिकार (Right to Information) से सामने आई जानकारी ने वन विभाग (Forest Department) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपवन संरक्षक कार्यालय, सवाई माधोपुर (आलनपुर नर्सरी) से प्राप्त सूचना (RTI) के अनुसार वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान अ*वैध हरी लकड़ी की कटाई एवं परिवहन से जुड़े केवल तीन प्रकरण दर्ज किए गए। इन मामलों में जुर्माना लगाया गया तथा दो वाहनों को जब्त किया गया।

यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता मुकेश भूप्रेमी ने RTI के माध्यम से प्राप्त की। उन्होंने बताया कि 7 जुलाई 2026 को बजरिया क्षेत्र में विकास कार्यों के दौरान पेड़ों की कटाई की शिकायत वन विभाग को की गई थी। उनके अनुसार मौके पर लकड़ी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की जानकारी भी विभाग को दी गई थी, लेकिन बाद में वन विभाग ने तहसीलदार की अनुमति का हवाला देते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।

मुकेश भूप्रेमी का कहना है कि यदि लकड़ी का परिवहन किया गया था, तो यह भी जांचा जाना चाहिए था कि उसके लिए वन विभाग से आवश्यक ट्रांजिट पास जारी किया गया था या नहीं। उनका कहना है कि लकड़ी परिवहन से जुड़े नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से पेड़ों की कटाई और लकड़ी के परिवहन की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन RTI से मिली जानकारी के अनुसार कार्रवाई के मामले बेहद कम हैं। उनके अनुसार इससे वन विभाग की निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।
मुकेश भूप्रेमी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि इससे जुड़े कुछ प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं। आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध साक्ष्यों और विधिक सलाह के आधार पर मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक भी ले जाया जाएगा।
उन्होंने अ*वैध पेड़ कटाई और लकड़ी के परिवहन पर प्रभावी निगरानी, नियमों का सख्ती से पालन और दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
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