बामनवास में सकल दिगम्बर जैन समाज पिपलाई द्वारा पर्वराज पर्युषण पर्व के समापन के बाद आज रविवार को क्षमावाणी पर्व मनाया गया। इस अवसर पर प्रात: काल जिनेन्द्र भगवान की वृहत शान्तिधारा और क्षमावाणी , पंचमेरु, निर्वाण क्षेत्र ,नवदेवता एवं नित्य नियम की पूजा की गई। शाम को श्री जी के कलाशाभिषेक का भव्य कार्यक्रम हुआ, जिसमें भगवान जिनेन्द्र की खुली बोली लगायी गई। फिर मन्दिर के प्रागंण मे श्रावक – श्राविकाओ द्वारा क्षमावाणी दिवस पर एक – दूसरे से “मिच्छामी दुक्कड़म” कहकर सालभर में मन, वचन, काय से जाने अनजाने मे उनसे हुई गलतियों की हाथ जोड़कर क्षमा मांगी l

सकल दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक बाबुलाल जैन ने बताया कि क्षमा वीरस्य भूषणम् की युक्ति निश्चित रूप से वीरों का अस्त्र है। जिन्होंने क्रोध, द्वेष को छोड़कर अपने अन्तरंग में सारी शक्ति समाहित कर बहिरंग में सर्व जीवों से मित्रता रखते है, क्षमा केवल मित्रों से ही नहीं अपितु शत्रुओं से भी मांगनी चाहिए l क्षमा एक मिश्री के समान है जो हमेशा शांत जैसे मिठास सर्वत्र फैला सकती है।
इस अवसर पर प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार जैन ने बताया की जैन धर्म के सिद्धांतों की अनुपालन करने वाला कोई भी जैन बन सकता है और क्षमावाणी पर्व मना सकता है। क्षमा पर्व मनाना केवल जैनियों का ही अधिकार नहीं है। क्षमा एक ऐसा आत्मशोधन गुण है, जिसकी सभी को आवश्यकता है क्योकिं इन्सान को गलतियों का पुतला कहा जाता है। lगलती मानना एवं उसमें सुधार करने का सभी को अधिकार होना चाहिए। अंतस के मूलगुण किसी धर्म – संप्रदाय से बंधे नहीं होते। इसलिए क्षमापर्व सर्वधर्म समन्वय का भी आधार है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में क्षमावाणी पर्व को वैश्विक स्तर पर विश्व क्षमा दिवस के रूप मे मनाने की महती आवश्यकता है। केन्द्र एवं राज्य सरकार को क्षमावाणी पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर इस त्यौहार को सरकारी स्तर पर मनाये जाना चाहिए। जिससे लोगों में मनमुटाव लड़ाई की संभावना समाप्त होगी और आपसी समन्वय एवं सद्धभावना से सम्पूर्ण देश में एकता और भाईचारे की भावना जागृत होगी। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेविका धापू देवी जैन, अध्यक्ष रमेश जैन, उपाध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, सचिव सुनील जैन, संयुक्त सचिव आशु जैन, आशा जैन, सुमनलता जैन, रजनी जैन, ललिता जैन, सपना जैन आदि उपस्थित रहे।
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