गत दिनों इलाकों को लेकर अपनी बहिन के साथ जंग में घायल हुई बाघिन एरोहेड की बेटी सिद्धि का मंगलवार को वन अधिकारियों की मौजूदगी में उपचार किया गया। वन विभाग की टीम सुबह ग्यारह बजे जंगल में पहुंची। इसके बाद वन विभाग की टीम को जोगी महल और राजबाग तालाब एवं पदमला तालाब के पास बाघिन की साइटिंग हुई। वन विभाग के रेस्क्यू टीम प्रभारी राजवीर सिंह ने राजबाग तालाब के पास बाघिन को ट्रेंकुलाइज किया। इसके बाद पशु चिकित्सक डॉक्टर राजीव गर्ग और डॉक्टर चंद्रप्रकाश मीना ने बाघिन का उपचार किया। उपचार के बाद बाघिन को रिवायवल दिया गया। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन की हालत में पहले से सुधार नजर आ रहा है। वहीं एहतियात के तौर पर वन विभाग की ओर से बाघिन की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सीसीएफ टीसी वर्मा, डीएफओ महेंद्र शर्मा, एसीएफ संजीव शर्मा मौजूद रहे।

पहले बाघिन सिद्धि का सोमवार को करना था उपचार
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग को सोमवार को बाघिन के घायल होने की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद वन अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया था। बाघिन का उपचार करने के लिए बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने की उच्च अधिकारियों से अनुमति मांगी थी। इसके बाद सोमवार को ही वन विभाग की ओर से रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थानीय स्तर पर पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन उच्च अधिकारियों की अनुमति नहीं मिलने के कारण सोमवार को बाघिन सिद्धि को ट्रेंकुलाइज नहीं किया जा सका।
बाघिन के घाव में पड़ गए थे कीड़े
जानकारी के अनुसार बाघिन के कंधे पर हो रहे घाव में कीड़े पड़ गए थे। ऐसे में बाघिन का उपचार करना बहुत जरूरी था। अगर बाघिन का समय पर उपचार नहीं किया जाता था तो संक्रमण बढ़ने की आशंका बन सकती थी।
देश में बाघिन की जीभ पर टांके लगाने का यह पहला मामला
बाघिन की जीभ एक तरफ से कटने के कारण लटक गई थी। ऐसे में पशु चिकित्सकों ने उपचार के दौरान बाघिन की जीभ पर तकरीबन 12 टांके लगाए है। पशु चिकित्सक डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि रणथंभौर सहित पूरे देश भर में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान किसी भी बाघ या बाघिन की जीभ पर टांके लगाने का अपनी तरफ का पहला ऑपरेशन था। इससे पहले रणथंभौर में किसी भी बाघ, बाघिन के उपचार के दौरान जीभ पर टांके नहीं लगाए गए है।
खुद ही टूट जाएंगे टांके, फिर से बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने की जरूरत नहीं
पशु चिकित्सक डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि बाघिन के टांके काटने के लिए बाघिन को फिर से ट्रेंकुलाइज करने की जरूरत नहीं है। वन्यजीवों की जीभ खुरदरी होती है। ऐसे में कुछ दिनों में घाव भर जाएगा एवं टांके स्वत: ही टूट जाएंगे। इस प्रक्रिया में तीन से चार दिन का समय लगेगा। तब तक बाघिन शिकार करके भोजन नहीं कर सकेगी। हालांकि अभी बाघिन का पेट भरा हुआ है। ऐसे में अभी उसे भोजन की दरकार नहीं है।
ट्रेंकुलाइज करने के बाद बुधवार को राजबाग के पास आई बाघिन नजर
वन विभाग की ओर से बाघिन का उपचार करने के बाद वन विभाग की ओर से लगातार बाघिन सिद्धि की मॉनिटरिंग की जा रही है। वन विभाग से मिली जानकरी के अनुसार बाघिन बुधवार को सुबह लगभग सात बजे राजबाग इलाके में विचरण करती नजर आई। बाघिन की हालात अब पहले से बेहतर बताई जा रही है।
इनका कहना है:-
बाघिन का उपचार कर दिया गया है। बाघिन की जीभ पर टांके लगाए गए है। कंधे पर मिले घाव पर से कीड़े निकाल दिये गए है। बाघिन की हालात अब पहले से बेहतर है। बाघिन की लगातार मॉनिटरिंग कराई जा रही है।
महेंद्र शर्मा (उपवन सरंक्षक, रणथंभौर बाघ परियोजना, सवाई माधोपुर)
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