नई दिल्ली: अरावली पहाड़ियों की ‘नई परिभाषा’ पर हो रहे वि*रोध के बीच पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है। बयान के अनुसार, केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी कर अरावली क्षेत्र में किसी भी नई माइनिंग लीज को देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह प्र*तिबंध पूरी अरावली पर समान रूप से लागू होगा। केंद्र सरकार ने कहा है कि इसके पीछे मकसद अनियंत्रित खनन गतिविधियों को रोकना है।
बयान के अनुसार मंत्रालय ने भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद (आईसीएफ़आरई) को निर्देश दिया है कि वह पूरे अरावली क्षेत्र में ऐसे अतिरिक्त इलाकों और जोन की पहचान करे, जहां पहले से प्रति*बंधित क्षेत्रों के अलावा भी खनन पर रोक लगाई जानी चाहिए। सरकार ने कहा है कि वह अरावली की लंबे समय तक सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
आखिर क्यों छिड़ी है बहस:
केंद्र सरकार की सिफारिशों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की जिस परिभाषा को स्वीकार किया है, उसके अनुसार आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर (328 फीट) ऊँचे जमीन के हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियाँ, जो 500 मीटर के दायरे के अंदर हों और उनके बीच जमीन भी मौजूद हो, तब उन्हें अरावली शृंखला का हिस्सा माना जाएगा।
पर्यावरणविदों का कहना है कि सिर्फ ऊँचाई के आधार पर अरावली को परिभाषित करने से कई ऐसी पहाड़ियों पर खनन और निर्माण के लिए दरवाजा खुल जाने का खतरा पैदा हो जाएगा, जो 100 मीटर से छोटी हैं, झाड़ियों से ढँकी हुईं और पर्यावरण के लिए जरूरी हैं।
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