नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने जयपुर में एनएसयूआई राजस्थान के ‘सेव द अरावली’ मार्च में हिस्सा लिया और सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अरावली पहाड़ियों की ‘नई परिभाषा’ के खिलाफ प्रद*र्शन कर रही है। यह लोग अरावली को सुरक्षा देने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने दावा किया कि अगर अरावली पहाड़िया न हों तो रेगिस्तान दिल्ली तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में रेगिस्तान का जो फैलाव है वह अरावली पर्वतमाला की वजह से रुका हुआ है।
अगर वह कुछ सालों बाद नष्ट हो जाएगा, तो दिल्ली तक रेगिस्तान पहुंच सकता है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार या तो विवश है या मजबूर है। अभी तक इस मामले को सुलझाने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं गई है। ये डबल इंजन नहीं बल्कि चार इंजन वाली सरकार है और ये चारों इंजन दौड़ रहे हैं कि कैसे अरावली पर्वत को नष्ट किया जाए।
जाने क्या है मामला:
केंद्र सरकार की सिफारिशों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की जिस परिभाषा को स्वीकार किया है, उसके अनुसार आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर (328 फीट) ऊँचे ज़मीन के हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। दो या उससे ज्यादा ऐसी पहाड़ियाँ, जो 500 मीटर के दायरे के अंदर हों और उनके बीच जमीन भी मौजूद हो, तब उन्हें अरावली शृंखला का हिस्सा माना जाएगा।
पर्यावरणविदों का कहना है कि सिर्फ ऊँचाई के आधार पर अरावली को परिभाषित करने से कई ऐसी पहाड़ियों पर खनन और निर्माण के लिए दरवाजा खुल जाने का खतरा पैदा हो जाएगा, जो 100 मीटर से छोटी हैं, झाड़ियों से ढँकी हैं और पर्यावरण के लिए जरूरी हैं। अरावली पहाड़ियों की ‘नई परिभाषा’ पर हो रहे वि*रोध के बीच पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है। बयान के अनुसार केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी कर अरावली क्षेत्र में किसी भी नई माइनिंग लीज को देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह प्रति*बंध पूरी अरावली पर समान रूप से लागू होगा।
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