नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सशर्त संघर्षविराम का एक अहम हिस्सा इस समुद्री मार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही है, जिससे दुनिया का करीब 20% तेल और एलएनजी गुजरता है। ईरान की संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने इस जलडमरूमध्य को “अति संवेदनशील सीमा” बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है और यहां से गुजरने वाले जहाजों को शुल्क ईरानी मुद्रा रियाल में देना होगा।
वहीं डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट जल्द ही पूरी तरह खुल जाएगा। अमेरिका की सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के दो युद्धपोतों ने समुद्री सुरंगों को हटाने के अभियान के तहत इस जलमार्ग को पार किया है। हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी विदेशी सैन्य जहाज के प्रवेश की कोशिश पर सख्त जवाब दिया जाएगा।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस बीच ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसकी चेतावनी के बाद एक अमेरिकी युद्धपोत को वापस लौटना पड़ा। पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में तनाव बरकरार है।
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