गुर्जर समाज सहित कई समाजों में बुरी तरह पैर पसार चुकी सामाजिक बुराई मृत्युभोज को बन्द करने के लिए सत्ताईसा गुर्जर पंच कार्यकारिणी की ओर गांव-गांव अभियान चलाया गया और मृत्युभोज नहीं करने की बात की गई। सत्ताईसा क्षेत्र के कोई भी गांव में मृत्यु की सूचना पर शोक परिवार के लोगों को नुक्ता नहीं करने के लिए समझाइश के लिए जाते है। बात नहीं मानने पर पुलिस प्रशासन का सहयोग भी लिया जा रहा है। जिसका परिणाम सत्ताईसा कार्यकारिणी को मिलने लगा। धीरे-धीरे समाज के लोग मृत्युभोज नहीं करने के लिए मानने लगे। सत्ताईसा गुर्जर पंच सचिव रुपसिंह गुर्जर ने बताया की छाण गांव में प्रभु गुर्जर की मां नटी का निधन हो गया है।

जिसका नुक्ता 4 अगस्त को होना था लेकिन पंचों की समझाइश से केवल सात कन्याओं को भोजन करवाकर मृत्युभोज बन्द करने का समर्थन किया है। सत्ताईसा गुर्जर पंच नवगठित कार्यकारिणी ने 28 फरवरी को शपथ ग्रहण के दौरान शपथ ली की समाज मे फैली नुक्ता प्रथा को जड़ से खत्म किया जाएगा चाहे कानून का सहारा लेना पड़े। जिसे खत्म करने के लिए कार्यकारिणी अग्रसर है।
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