राजस्थान के सभी विद्युत निगमों के कनिष्ठ अभियंता 10 वर्षों से चली आ रही अपनी वेतन एवं एसीपी विसंगति दूर करने हेतु गत 13 जून से जयपुर में लगभग 3000 कनिष्ठ अभियंताओं के साथ कार्य बहिष्कार कर जयपुर में महापड़ाव डाले हुए हैं। जो जयपुर नहीं आए हैं वो सभी स्थानीय स्तर पर कार्य बहिष्कार पर है। पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ़ राजस्थान के नेतृत्व में 3 मार्च को भी कनिष्ठ अभियंताओं ने विद्युत भवन जयपुर में एक दिन धरना दिया था।

राज्य में 6ठें वेतन आयोग लागू करते समय जो वेतन विसंगति रह गयी थी, वो आज तक दूर नहीं हुई है। राज्य में किसी भी विभाग के कर्मचारी संवर्ग में ऐसी वेतन तथा एसीपी विसंगति नहीं है कि पूरे सेवाकाल में पदोन्नति न होने पर 9-18-27 वर्ष में भी पदोन्नति वाले पद का वेतनमान ना मिलता हो। इसके लिए संगठन लगातार संघर्ष करता रहा है। प्रदेश संयुक्त सचिव पॉवर इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान नितिन जोशी ने बताया की पिछले 12 वर्षों में सरकार आती – जाती रही है, परंतु इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया है।
आपातकालीन सेवा में बिजली व्यवस्था सुचारू रखने हेतु दिन रात काम करने वाले कनिष्ठ अभियंताओं की राज्य सरकार लगातार अनदेखी करती रही है, जिससे सभी अभियंताओं में रोष चरम स्तर पर पहुंच गया है। पूरे देश में राजस्थान का कनिष्ठ अभियंता ही ऐसा है जो वेतनमान के मामले में सबसे पिछड़ा हुआ है। कनिष्ठ अभियंता 12 वर्ष पहले कर्मचारी संवर्ग में प्रथम श्रेणी का दर्जा रखता था, वो आज तृतीय श्रेणी के दर्जे पर आ गया है। सबसे अहम बात यह कि ऊर्जा विभाग इस वेतन और एसीपी विसंगति को दूर करने की कई बार अनुशंसा कर चुका है कि इस हेतु पूर्व की भांति शुरुआती 10 वेतन वृद्धि (10 इंक्रीमेंट) या प्रथम एसीपी 5400 ग्रेड पे पर कर विसंगति दूर की जाए परंतु राज्य सरकार और वित्त विभाग इसे अटकाए हुए है।
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