सवाई माधोपुर के मलारना डूंगर में बिलकिस बानो के साथ सामुहिक दुष्कर्म के 7 आरोपियों को असंवैधानिक रिहाई को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों ने तहसीलदार कृष्णमुरारी मीना को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि गुजरात में 2002 में हुए दंगों में बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म एवं 7 लोगों हत्या की गई थी, जिसमें 3 वर्ष की मासूम बच्ची भी शामिल थी।
इस मामले पर अहमदाबाद न्यायालय ने 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनवाई थी। लेकिन 1 दोषी की मृत्यु होने के बाद 11 आरोपियों को उम्रकैद अथवा आजीवन कारावास की सजा हुई थी। 11 आरोपियों को बीते 14 वर्ष से कारावास में बंद थे।

लेकिन गुजरात सरकार ने बीते स्वतंत्रता दिवस पर सभी 11 आरोपियों को असंवैधानिक रूप से रिहा कर दिया गया। जिसमें गुजरात सरकार ने RPC section 432 के तहत आरोपियों को संगीन आरोपी में दया नहीं दी जा सकती है।
इस संबंध में गुजरात सरकार ने RPC section 432 A (1992) का हवाला दिया है। जोकि कार्यशैली एवं न्यायिक कार्य में खत्म हो चुका है। इस मामले को लेकर ज्ञापन के माध्यम से आरोपियों को पुनः कारावास में भेजने की मांग की गई है। इस दौरान अकरम बुनियाद, आदिल खान, अरबाज, अकबर, माजिद एवं मोनीश आदि उपस्थित रहे।
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