धनतेरस के अवसर पर अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के प्रतिष्ठित पटल पर दीपावली के उपलक्ष्य में एक कवि सम्मेलन “ज्योति कलश छलके” का सवाई माधोपुर से वर्चुअल आयोजन किया गया। इस कवि सम्मेलन में ज्योति कलश को छलकाने हेतु दिल्ली से बनवारी लाल गौड़, ब्रह्म देव शर्मा तथा जय प्रकाश पाण्डे, मेरठ से किशन स्वरूप, गाजियाबाद से इस संस्था के वैश्विक अध्यक्ष और इस पटल के समन्वयक प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव तथा सवाई माधोपुर से डॉ. मधु मुकुल चतुर्वेदी उपस्थित थे। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता बनवारी लाल गौड़ ने की तथा संचालन डॉ. मधु मुकुल चतुर्वेदी द्वारा किया गया।

ब्रह्म देव शर्मा ने कविता “युद्ध की अनिवार्यता का अंत होना चाहिए, आदमी वहशी नहीं, अब संत होना चाहिए।” तथा “हर मन आलोकित हो जाए, ऐसा दिया जले, हर मन की कालिख मिट जाए, ऐसा दिया जले” प्रस्तुत की। जय प्रकाश पाण्डे ने कविता “रेत पर निशान सी हो रही है ज़िंदगी,लहरों का थपेड़ा आया, मिट गई ज़िंदगी” प्रस्तुत की। किशन स्वरूप ने कविता “शक्ल पर क्या क्या लिखा है, ये तो समझा दे मुझे, कर सकूं पहचान अपनी, आइना लादे मुझे” प्रस्तुत की। बनवारी लाल गौड़ ने कविता “ये शहर है जनाब, व्यस्त रहता है, बिना कुछ कहे, बहुत कुछ कहता है” तथा “ए हिमखंड गलो मत ऐसे, जैसे मेरी उमर गली” प्रस्तुत की।

प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव ने दीपावली पर्व के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला और कविता “मेरी ज़िन्दगी का दरख़्त जो संग हादसों के बड़ा हुआ, हुई अपने खून की बारिशें तो ये ज़ख्म दिल का हरा हुआ” तथा “जिसकी अपने लिए कोई निष्ठा नहीं, उसकी कोई कहीं भी प्रतिष्ठा नहीं” प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. मधु मुकुल चतुर्वेदी ने कार्यक्रम का शीर्षक गीत “ज्योति कलश छलके” प्रस्तुत किया। शनिवार देर रात्रि तक चले इस कवि सम्मेलन को देश और विदेश से अनेक लोगों ने देखा और सुना।
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