शिवाड़ कस्बे सहित क्षेत्र की महापुरा, टापुर, इसरदा, डीडायच पंचायत की दो दर्जन गांव ढाणी में बारिश के अभाव में फसल सूखकर दम तोड़ने लगी है। वहीं खाली पड़े खेतों में पानी के कारण रबी की फसलें बोने का भविष्य अंधकार में दिखाई देने लगा है जिसके चलते किसान चिन्तित दिखाई देने लगा है। इस स्थिति को देखते हैं किसानों ने राज्य सरकार से क्षेत्र में अकाल की घोषणा कर सर्वे करवा कर सरकार से सहायता राशि देने की मांग की है।
किसान प्रहलाद जाट, शंकर गुर्जर, शिवनारायण मीणा ने बताया कि क्षेत्र में डेढ़ महीने से बारिश नहीं होने से खरीफ की फसल मूंग, उड़द, तिलहन, ज्वार, बाजरा, मूंगफली, सूखकर दम तोड़ने के कगार पर है। उन्होंने कहा कि किसान इन फसलों की हकाई जुताई बुवाई गुड़ाई में हजारों रुपए खर्च कर फसल होने की आस लगाए बैठा था।

परंतु एक बारिश के कमी के कारण ईश्वर ने किसानों के मुंह से रोटी छीन ली। फसल के नाम पर किसानों को कुछ भी नहीं मिल पाएगा यह स्थिति रबी की फसल का अभी से दिखाई देने लगा है। क्षेत्र के किसानों ने अपने-अपने खेतों की हकाई जुताई कर खेतों में रवि की फसल बोने के लिए तैयार कर रखा है परंतु बारिश नहीं होने की स्थिति में पानी के अभाव में इन खेतों में भी फसलों की बुवाई नहीं की जा सकती। जिसके चलते क्षेत्रीय किसान चिंतित दिखाई देने लगा है।
जगदीश प्रसाद सोनी, राम राय चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में न्यूनतम बारिश होने के कारण क्षेत्र के सभी तालाब कुवे बावड़ी बंधे खाली पड़े है। जिसके चलते किसानों की फसलों को साथ ही आमजन को कुछ समय बाद पीने के पानी की कमी का सामना भी करना पड़ेगा। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की चिताओं को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र का सर्वे करवाकर किसानो की सहायता करने की मांग की है।
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