सवाई माधोपुर: राजस्थान सरकार के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने गुरुवार को जिले के राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य, पालीघाट में घड़ियालों के संरक्षण और सुरक्षा की एक अनूठी पहल की शुरुआत की। उन्होंने पांच माह उम्र के 10 घड़ियाल हैचलिंग्स (शावक) को चम्बल नदी में उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा। वन एवं पर्यावरण विभाग, राजस्थान द्वारा रियरिंग फास्ट ट्रैक-हेड स्टार्टिंग कार्यक्रम के तहत घड़ियाल के इन बच्चों को अंडों से बाहर निकालने के बाद संरक्षित किया गया था।
इस पुनर्वास कार्यक्रम के तहत कुल 30 घड़ियाल हैचलिंग्स को जिले के खण्डार स्थित राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य, पालीघाट में उनके प्राकृतिक आवास चम्बल नदी में छोड़ा जाना है। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक शिखा मेहरा, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) राजेश गुप्ता, उप वन संरक्षक एवं उप क्षेत्र निदेशक (प्रथम), रणथम्भौर बाघ परियोजना डॉ. रामानंद भाकर, रेंजर किशन कुमार सांखला उपस्थित रहे। राज्यमंत्री संजय शर्मा ने बताया कि यह घड़ियाल संरक्षण का यह अनूठा कार्यक्रम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिशा निर्देशानुसार शुरू किया गया है।
वन विभाग ने चंबल किनारे मादा घड़ियाल के अंडे देने के स्थान से अंडे से निकले बच्चों को संरक्षण के लिए रेस्क्यू किया गया। तब इनकी लम्बाई लगभग 25 सेंटीमीटर थी। सुरक्षा की दृष्टि से उन सभी को अलग-अलग केबिन में रखकर घड़ियाल के शावकों को नेचुरल फूड (जिंदा मछली) दी गई, जिससे वह शिकार की आदत नहीं भूलें। अब जब ये घड़ियाल के बच्चे 75 सेंटीमीटर के हो गए हैं, तब उनको प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जा रहा है।
कुल 30 में से 10 घड़ियाल शावकों को आज छोड़ा गया है, शेष को 5-6 दिन के अंतराल पर चंबल नदी में छोड़ा जाएगा। इन शावकों की निगरानी के लिए इनके शरीर पर एक डिवाइस लगाया गया है, जिससे इनकी पानी के अन्दर एक-एक गतिविधि की निगरानी वन विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
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