लोगों ने हस्ताक्षर कर यातायात नियमों की पालना की ली शपथ
संविधान दिवस के अवसर पर आज शनिवार को वतन फाउंडेशन तथा राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की जिला इकाई के संयुक्त तत्वाधान में प्रातः 10.30 बजे बजरिया स्थित हम्मीर सर्किल पर संविधान की प्रस्तावना की शपथ का आयोजन किया गया। फाउंडेशन के प्रवक्ता मोइन खान ने बताया कि संविधान दिवस के अवसर पर संविधान की प्रस्तावना की शपथ के पश्चात यातायात के नियमों के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से आमजन के साथ समझाइश की गई एवं हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। फाउंडेशन के हुसैन आर्मी ने बताया कि इस अवसर पर आमजन तथा प्राधिकरण एवं फाउंडेशन के सदस्यों द्वारा संविधान की प्रस्तावना की शपथ ली गई। प्रस्तावना का प्रतिज्ञान तरुणा बैरवा द्वारा करवाया गया।
उपस्थित सदस्यों द्वारा आम जन में यातायात नियमों की पालना हेतु एक शपथ दिलवाकर हस्ताक्षर भी करवाए गए। इस दौरान पूर्ण रूप से नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों का माला पहनाकर स्वागत किया गया तथा बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चालकों को पुष्प भेंट कर यातायात नियमों की पालना हेतु समझाइश की गई तथा शपथ पर भी हस्ताक्षर करवाए गए। इस अवसर पर प्रोफेसर रामलाल बैरवा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हर भारतीय नागरिक के लिए हर साल 26 नवंबर का दिन बेहद खास होता है। दरअसल यही वह दिन है जब देश की संविधान सभा ने मौजूदा संविधान को विधिवत रूप से अपनाया था।

अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम बैरवा ने कहा कि यह संविधान ही है जो हमें एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का अहसास कराता है। एडवोकेट दानिश खान ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जहां संविधान के दिए मौलिक अधिकार हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैं, वहीं इसमें दिए मौलिक कर्तव्य में हमें हमारी जिम्मेदारियां भी याद दिलाते हैं। हर वर्ष 26 नवंबर का दिन देश में संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। एडवोकेट अब्दुल हासिब ने कहा कि 26 नवंबर को राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में भी जाना जाता है। 26 नवंबर, 1949 को ही देश की संविधान सभा ने वर्तमान संविधान को विधिवत रूप से अपनाया था। हालांकि इसे 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था।
पार्षद सुनील तिलकर ने बताया कि पूरा संविधान तैयार करने में 2 वर्ष, 11 माह 18 दिन लगे थे। यह 26 नवंबर, 1949 को पूरा हुआ था। 26 जनवरी, 1950 को भारत गणराज्य का यह संविधान लागू हुआ था। जुगराज बैरवा ने बताया कि संविधान की असली कॉपी बेहतरीन कैलीग्राफी के जरिए इटैलिक अक्षरों में लिखी गई है। इसके हर पन्ने को शांति निकेतन के कलाकारों ने सजाया था। संविधान की असली प्रतियां हिंदी और इंग्लिश दो भाषाओं में लिखी गई थीं। इन्हें आज भी भारत की संसद में हीलियम भरे डिब्बों में सुरक्षित रखा गया है। इस अवसर पर फाउंडेशन के सदस्य सावित्री बैरवा, जाबिर खान, सुनील तिलकर, संजय बैरवा, राजेश पहाड़िया, महेश योगी, राजेश पहाड़िया, रशीद अहमद देशवाली आदि के साथ जिला विधिक प्राधिकरण के कार्मिकों के अतिरिक्त यातायात कर्मी एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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