अब जिले की सभी सातों पंचायत समितियों में महिला मेट की संख्या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। जिला कलेक्टर राजेन्द्र किशन कई माह से इसके लिये विशेष प्रयास कर रहे थे। उनके निर्देशन में सभी पंचायत समितियों ने यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। चौथ का बरवाड़ा और मलारना डूंगर ने यह लक्ष्य गत सप्ताह में हासिल किया है।
आज सोमवार को कलेक्ट्रेट में ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक लेते हुये एडीएम डॉ. सूरज सिंह नेगी ने इस पर संतोष जताया तथा मनरेगा में अन्य बिन्दुओं में भी प्रगति हासिल करने के निर्देश दिये। एडीएम ने बताया कि गत पखवाडे में जिले में 38349 श्रमिकों ने मनरेगा में कार्य किया, इससे पूर्व के पखवाडे में 31450 ने ही काम किया था।

यह प्रगति अच्छी है लेकिन इसमें भी सुधार सम्भव है। सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा में काम चलाना सुनिश्चित करें। एडीएम ने अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिये। जिले में चालू वित्तीय वर्ष में 919 परिवारों ने मनरेगा में 100 दिन कार्य कर लिया है। इनमें से बामनवास में 459 परिवार हैं। एडीएम ने लाभार्थी श्रमिक के बैंक खाते में पूर्व में जमा करवाई मजदूरी राशि उसको नहीं मिलने के प्रकरणों की समीक्षा की।
उन्होंने ऐसे सभी प्रकरणों में तकनीकि सुधार कर एवं दस्तावेज की आवश्यकता हो तो सम्बंधित श्रमिक से सम्पर्क कर त्रुटि दूर करने के निर्देश दिये। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन के प्रथम चरण व वर्तमान में चल रहे ओडीएफ-प्लस, नव गठित ग्राम पंचायतों में राजीव गांधी सेवा केन्द्र निर्माण समेत विभिन्न बिन्दुओं की विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्य आयोजना अधिकारी बी.एल. बैरवा ने पंचायती राज से सम्बंधित राज्य सरकार की विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी तथा प्रशासन गांवों के संग अभियान में विभाग द्वारा अब तक उपलब्धि के सम्बंध में एडीएम को फीडबैक दिया।
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