विश्व आद्र भूमि दिवस पर आज मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित केन्द्रीय विद्यालय में जिला पर्यावरण समिति द्वारा प्रश्नोत्तरी व अन्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में केन्द्रीय विद्यालय प्रथम और रॉयल अल्फा विद्यालय द्वितीय स्थान पर रहे। जिन्हें मुख्य अतिथि नगर परिषद सभापति विमल महावर और एसडीएम कपिल शर्मा ने पुरूस्कार वितरित किये। इस अवसर पर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो जिलेभर में आमजन को आर्द्र भूमि और ताजा पानी के महत्व को समझाने के साथ इनके संरक्षण से जुड़ने का आव्हान करेगा।

सामाजिक वानिकी के डीएफओ जयराम पांडे ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण आज बहुत बड़ा मुद्दा है जिससे न केवल मानव बल्कि पूरी पृथ्वी, सभी जीवों, पेड़ पौधों का अस्तित्व जुड़ा हुआ है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु जल संरक्षण और इसकी शुद्धता है। प्रकृति जितना साफ पानी हर साल हमको देती है, उससे ज्यादा हम दोहन कर देते हैं। इससे प्राकृतिक चक्र गड़बड़ा रहा है। खेती, पशुपालन, मछलीपालन आदि व्यवसायों से जुडे कई समुदायों की आजीविका पर विपरीत असर पड़ रहा है। हम सबको आद्र भूमि बचानी होगी। इसमें ताजा पानी के साथ ही उससे जुड़ी भूमि शामिल हैं। इसमें नदियां, तालाब, झील, दलदल, बाढ़ के मैदान, समुद्री किनारे, मैंग्रोव, लैगून, कोरल रीफ शामिल हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने चौथ का बरवाड़ा स्थित शिव तालाब को वेटलैंड के रूप में चिन्हित किया है। सरकार के साथ ही आमजन विशेषकर स्कूली विद्यार्थियों का कर्तव्य है कि किसी भी तालाब नदी, झील में गंदगी न फैलाये, इनका संरक्षण करें।
केन्द्रीय विद्यालय के प्रिंसिपल राजेश्वर सिंह ने बताया कि 2 फरवरी 1971 के ईरान के रामसर में कन्वेंशन ऑफ वेटलेंड पर हस्ताक्षर कर आर्द्र भूमि के संरक्षण का संकल्प जताया गया। यह कन्वेंशन 1975 में लागू हुआ। इसी संकल्प को लगातार मजबूत बनाने के लिये यह दिवस मनाया जाता है। इस बार की “थीम वाटर एंड वेटलैंड” है।
कार्यक्रम में शिक्षाविद संजय, अरविन्द कुमार, थॉमस कुट्टी, मलखान मीणा तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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