नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नोटिस जारी किया है। मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी। ममता बनर्जी ने कोर्ट में दलील दी कि एसआईआर समावेशी प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह विभाजनकारी है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि कृपया हमारे लोकतंत्र को बचा लें।
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दिवान ने कोर्ट को बताया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं की सूची का पुनरीक्षण बाकी है और अब सुधारात्मक कदम उठाने के लिए लगभग न के बराबर समय बचा है। पश्चिम बंगाल में इसी साल अप्रैल-मई में चुनाव होने हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा है। मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त को कई चिट्ठियां लिखीं। ममता बनर्जी ने राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से आम लोगों को हो रही परेशानियों और इसमें हो रही अनियमितताओं के बारे में बताने के लिए सुप्रीम कोर्ट से पांच मिनट मांगे।
वहीं, सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इलेक्टोरल रोल रिवीजन माइग्रेशन से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान भी होता है और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर उस व्यक्ति का नाम सूची में हो, जिनके पास पूरे दस्तावेज हों। ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग आधार कार्ड को मंजूरी नहीं दे रहा और वो मतदाताओं से दूसरे दस्तावेज मांग रहा है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यही पैमाना असम पर लागू क्यों नहीं हो रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि बहुत सारे जीवित लोगों को भी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने मृ*त घोषित कर दिया।
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