चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. टी.आर. मीना ने बताया कि स्वाइन फ्लू संक्रामक रोग है जो एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में निकट सम्पर्क अथवा उससे संक्रमित वस्तु के माध्यम से फैलता है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक लक्षणों के दिखाई देते ही उपचार लेने से स्वाइन फ्लू रोग से ग्रसित होने की आशंका कम हो जाती है। इस रोग से घबराएं नहीं इसका इलाज संभव है।
आमजन अपनी रोजाना की दिनचर्या में अगर थोड़ा एहतियात बरतें तो इस रोग कर चपेट में आपने की संभावनाएं कम हो जाती हैं इसके लिए अपने मुंह व नाक को ढंक कर रखें। खांसते व छींकते समय अपने मुंह पर रूमाल अथवा टिश्यु पेपर से ढंक कर रखें। भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें, अगर जाना भी पड़े तो मास्क का प्रयोग करें। नियमित होथ व मुंह धोएं, कोई भी खाने की वस्तु खाने से पहले हाथ अवश्य धोएं। खांसी जुकाम होने पर तुरंत डाॅक्टर के पास जाकर जांच करवाएं। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं, पांच साल से छोटे बच्चों का खास खयाल रखा जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू के पूरे प्रदेश में रेड अलर्ट घोषित होने के साथ ही जिला अस्पताल में स्वाइन फलू की जांच के लिए नमूने एकत्रित करने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जांच के पाॅजिटिव पाए जाने पर यथाशीघ्र उपचार किया जाएगा। स्वाइन फ्लू पर नियंत्रण, रोकथाम एवं उपचार के लिए की गई व्यवस्थाओं की जिला एवं निदेशालय स्तर से दैनिक माॅनिटरिंग की जा रही है। विभागीय टोल फ्री नंबर 104 पर काॅल करके स्वाइन फलू के ल़क्षणों, जांच एवं उपचार के बारे में जानकारी ली जा सकती है।
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