बाल विवाह अभिशाप है और कानूनी अपराध भी है, इसके बावजूद ग्रामीण अंचल में बाल विवाह एक परंपरा के रूप में सबकी नजर बचाकर किये जा रहे है। हालांकि बेटियों के अन्दर शिक्षा से आए बदलाव के चलते नाबालिग दुल्हनें बालिग होने तक ससुराल जाने से इंकार करने लगी है। ऐसे ही कुछ नाजारा राउमा विद्यालय हिन्दूपुरा में राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे बाल संरक्षण संकल्प यात्रा में बाल विवाह के दुष्परिणाम पर आधारित खेल-खेल में बाल विवाह पर परिचर्चा के दौरान देखने को मिला। नाबालिग दुल्हनों से जब उनसेे ससुराल पर सवाल किया गया तो नाबालिग दुल्हन पदमावती (परिवर्तित नाम) 14 वर्ष 8वीं को अपने ससुराल का नाम ही पता नहीं है, तो वही अनीता (परिवर्तित नाम) 9 वर्ष चौथी को अपने पति का नाम नहीं पता, छाया (परिवर्तित नाम) 15 वर्ष 9वीं को अपने ससुर का नाम नहीं पता है। इन सबको बस इतना पता है कि कही परणा दी गई हैं। जब उनसे ये पुछा गया कि ससुराल गई है तो उन्होंन 18 से पहले ससुराल जाने से साफ मना कर दिया।

छाया बताती है कि लड़के की शादी 21 और लड़की की शादी 18 साल से पहले करना अपराध है। जब ससुराल से मुखलावा का दबाव पड़ा तो अपने माता-पिता से जाने से साफ इंकार कर दिया। विद्यालय में बच्चों को बाल अधिकारों पर चर्चा करते हुए बाल विवाह के दुष्परिणाम भी बताये गये साथ ही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दी गई। बाल संरक्षण संकल्प यात्रा सोमवार को हिन्दूपुरा पहुंचकर सरपंच नरेन्द्र कुमार महावर सहित पंचायत सदस्यों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर बच्चों के हितों में कार्य करने वाली ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण कमेटी का कर सदस्यों का क्षमतावर्धन किया गया। साथ ही यात्रा के सात संकल्प पर चर्चा किया गया। ग्राम भ्रमण के दौरान सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के 20 आवेदन आनलाईन कराने की सहयोग किया गया।
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