Sunday , 7 June 2026
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उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म एवं अनंत चतुर्दशी मनाई

सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में चल रहे दशलक्षण पर्यूषण पर्व के दौरान मंगलवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म व 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक उत्साह पूर्वक मनाया गया। साथ ही अनंत चतुर्दशी के अवसर पर जिनालयों में सांकेतिक रूप से भगवान के कलशाभिषेक कार्यक्रम आयोजित हुए।
समाज के प्रवक्ता प्रवीण जैन ने बताया कि जिला मुख्यालय पर आलनपुर स्थित नेमिनाथ अतिशय क्षेत्र दीवान की नसिया में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए समाज अध्यक्ष रमेश चंद कासलीवाल के सानिध्य एवं पंडित उमेश जैन शास्त्री द्वारा उच्चारित मंत्रों के बीच जिनेंद्र देव का अभिषेक कर विश्व की सुख समृद्धि व शांति की कामना की गई। धर्मावलंबियों ने अपने घरों पर अष्ट द्रव्यों से उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म, अनंत चतुर्दशी व दशलक्षण मंडल विधान की पूजन कर 23अर्घ्य समर्पित किए गए। वहीं भगवान वासुपूज्य की पूजन कर भाव-भीनी भक्ति के साथ मोक्ष के प्रतीक स्वरूप मोदक (निर्वाण लड्डू) अर्पण कर जन्म-मरण के चक्र से निकल मोक्ष प्राप्त करने की भावना प्रकट की।

Celebrated the brahmacharya religion and Anant Chaturdashi

इस अवसर पर दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चमत्कार में ससंघ वर्षायोग कर रही आर्यिका विजितमति माताजी ने अपने संदेश में कहा कि आत्मा की पवित्रता ही ब्रह्मचर्य है। ब्रह्मचर्य धर्म के लिए मन पर नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने कहा कि कामवासना जागृत करने वाले निमित्तों से दूर रहना चाहिए। मानव जीवन यदि गुलाब का फूल है तो ब्रह्मचर्य उसकी सुगंध है।
इसी प्रकार गंगापुर सिटी में जैन धर्मावलंबियों ने बड़े ही भक्ति भाव के साथ में उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का दिवस मनाते हुए अपने अपने घरों में अनंतनाथ भगवान वासपूज्य भगवान 24 तीर्थंकर दसलक्षण पूजा सोलह कारण पूजा करते हुए अष्ट द्रव्य चढ़ाकर जिनेंद्र भगवान की आराधना की।
जैन समाज के अध्यक्ष सुभाष जैन पांड्या और महामंत्री नरेंद्र गंगवाल ने संयुक्त रूप से बताया कि यह पहला मौका है जब जैन धर्मावलंबियों के इस महापर्व पर जैन मंदिर भक्तों के नहीं होने के कारण सूने रहे और सांकेतिक तौर पर केवल पुजारियों द्वारा भगवान के अभिषेक और शांति द्वारा की गई। आज उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के बारे में समाज के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एमपी जैन ने बताया कि सर्व प्रकार के राग द्वेष त्याग कर अपने आप में रमण करना और अपनी आत्मा का साक्षात्कार करना यही हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। समाज के सदस्य नरेंद्र जैन नृपत्या ने बताया कि उत्तम क्षमा भाव के साथ अपने अंदर के मान माया लोभ को जीतकर सत्य संयम तप को धारण कर त्याग और आकिंचन्य भाव से समस्त परिग्रहों को छोडकर जो जीव अपनी आत्मा में रम जाता है वहीं सच्चा उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करता है। यही मोक्ष मार्ग की अंतिम सीढ़ी है।

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