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किसान 15 अक्टूबर तक अनुकूल परिस्थिति में करें सरसों की उन्नत खेती

सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर जिले में सरसों तिलहनी फसलों में प्रमुख स्थान रखती है। जिले में लगभग 1.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई की जाती है। यह फसल कम लागत और कम सिंचाई में भी अधिक लाभ देती है। संयुक्त निदेशक कृषि राकेश कुमार अटल ने खाद एवं उर्वरक प्रबंधन के संबंध में बताया कि जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद एवं उवर्रक उपलब्ध है। कोई भी किसान खाद बीज व उवर्रक की उपलब्धता को लेकर चिंतित न हो।

 

Farmers should do advanced mustard cultivation under favorable conditions till October 15.

 

 

एक बीघा क्षेत्र के लिए डीएपी 23 किलो प्लस यूरिया 35 किलो। यदि डीएपी उपलब्ध न हो तो सुपर फॉस्फेट 63 किलो प्लस यूरिया 44 किलो का उपयोग करें। सुपर फॉस्फेट के उपयोग से तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा बढ़ती है एवं मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। इसके अतिरिक्त सल्फर 10 किलो, जिंक सल्फेट 5 किलो प्रति बीघा डालें। जैविक खाद (गोबर/वर्मी कम्पोस्ट 2-2.5 टन प्रति बीघा) बुवाई से पूर्व खेत में मिलाएं।

 

 

नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई के समय व शेष पहली सिंचाई के साथ दें। फसल सुरक्षा के लिए भूमिगत कीट एवं दीमक नियंत्रण हेतु बुवाई से पूर्व एक बीघा में क्यूनालफॉस डस्ट 6 किलो खेत में मिलाएं। रोग प्रबंधन हेतु सल्फर व जिंक का प्रयोग लाभकारी है। कृषि विभाग द्वारा किसान को सलाह दी गई है कि वे समय पर उन्नत किस्मों की बुवाई करें, अनुशंसित मात्रा में खाद-उर्वरक डालें तथा सिंचाई प्रबंधन पर ध्यान देकर उच्च उत्पादन प्राप्त करें।

 

सरसों की उन्नत किस्मों का करे उपयोग:

उन्होंने बताया कि सरसों के लिए 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान अंकुरण हेतु उपयुक्त है। यह फसल सिंचित व असिंचित दोनों परिस्थितियों में सफलतापूर्वक ली जाती है। अच्छे जल निकास वाली दोमट व हल्की दोमट भूमि उपयुक्त रहती है। सरसों की प्रमुख किस्में अरावली टी-59 (वरुणा), पूसा बोल्ड, आरएच-30, आरएच-725, पूसा जय किसान, आरएन-505, आरजीएन-145, वसुंधरा, जगन्नाथ, नवगोल्ड, एनआरसीडीआर-2, गिरिराज आदि किस्में जिले में सफलतापूर्वक बोई जाती हैं।

 

किसान भाई अपने क्षेत्र की सिंचित/असिंचित परिस्थितियों और बुवाई समय के अनुसार उपयुक्त किस्मों का चयन करें। बुवाई का समय असिंचित क्षेत्र में 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर, सिंचित क्षेत्र में अक्टूबर अंत तक विलम्ब से बोई गई सरसों में उपज हानि व कीट-रोग का प्रकोप अधिक होता है।

बीज मात्रा एवं बीजोपचार:

बीज की मात्रा 1 से 1.25 किग्रा प्रति बीघा। बीजोपचार 2 ग्राम मैन्कोजेब या 3 ग्राम थाइरम प्रति किलो बीज अथवा 6 ग्राम एप्रोन 35 एसडी से उपचार करें। रोगनाशी के साथ 6 से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलो बीज का प्रयोग लाभकारी है।

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