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तेज गर्मी में लू-तापघात के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवायजरी

सवाई माधोपुर: जिले में बढ़ती तेज गर्मी और हीटवेव की आंशकाओं को देखते हुए जिला कलक्टर शुभम चौधरी ने निर्देशानुसार चिकित्सा विभाग ने आम नागरिकों से गर्मी जनित लू तापघात से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। लू-तापघात प्रभावितों को तुरंत राहत देने हेतु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को तैयारियों के निर्देश जारी किए गए हैं।

 

 

Health department issued advisory for heat stroke in extreme heat in Sawai Madhopur

 

 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जैमिनी ने बताया कि अस्पतालों में लू-तापघात के रोगियों हेतु कुछ बैड आरक्षित रखते हुए वहां कूलर व शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, संस्थान में रोगी के उपचार हेतु आपातकालीन किट एवं आवश्यक दवाइयां रखने के निर्देश दिए हैं। सभी खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रचार-प्रसार के माध्यम से जनसाधारण को लू-तापघात से बचाव एवं उपचार हेतु जागरूक करने के निर्देश प्रदान किये गये हैं।

 

लू तापघात के लक्षण:

शरीर में लवण व पानी अपर्याप्त होने पर विषम गर्म वातावरण में लू व तापघात से सिर का भारीपन व अत्यधिक सिरदर्द होने लगता है। इसके अलावा अधिक प्यास लगाना, शरीर में भारीपन के साथ थकावट, जी मिचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढना, पसीना आना बंद होना, मुंह का लाल हो जाना, त्वचा का सूखा होना, अत्यधिक प्यास का लगना व बेहोशी जैसी स्थिति का होना आदि लक्षण आने लगते हैं। स्थानीय मौसम संबंधी सिद दर्द, बुखार (शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फेरेनहाइट होना), उल्टी, अत्यधिक पसीना एवं बेहोशी आना, कमजोरी महसूस होना, शरीर में ऐंठन, नब्ज असामान्य होना।

 

 

 

घबराहट, चक्कर आना, त्वचा का गर्म, लाल व सूखी होना। मांसपेशियों में कमजारी या ऐंठन, मतली या उल्टी आना, तेज सिर दर्द होना, चक्कर आना, बेहोंशी, सांस फूलना, धड़कन तेज होना। यदि व्यक्ति इन लक्षणों के साथ अस्वस्थ महसूस करे तो किसी छायांदार, ठण्डी जगह पर आराम करें। तुरंत पानी का सेवन करें, संभव हो तो ठण्डे पानी से नहा लें। लापरवाही ना बरतें शीघ्र ही नजदीकी राजकीय स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर परामर्श व उपचार लें।

 

लू लगने पर क्या करें:

लू-तापघात से प्रभावित रोगी को तुरंत छायादार जगह पर कपड़े ढीले कर लेटा दिया दें। रोगी को होश मे आने की दशा मे उसे ठण्डा पेय पदार्थ, जीवन रक्षक घोल, कच्चा आम का पन्ना दें। प्याज का रस अथवा जौ के आटे को भी ताप नियंत्रण हेतु मला जा सकता है। रोगी के शरीर का ताप कम करने के लिए यदि सम्भव हो तो उसे ठण्डे पानी से नहलाएं या उसके शरीर पर ठण्डे पानी की पट्टियां रखकर पूरे शरीर को ढंक दें। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं, जब तक की शरीर का तापमान कम नहीं हो जाता है।

 

 

 

साथ ही निकट की चिकित्सा संस्थान पर ले जा कर चिकित्सकीय परामर्श व उपचार करवाएं। सीएमएचओ ने आम जन से अपील की है कि जहां तक सम्भव हो धूप में न निकलें,  बताया कि भीषण गर्मी व हीटवेव से बचाव के लिए कुछ आवश्यक सावधानियों का पालन करना जरूरी है। जैसे दोपहर 12 से 3 बजे की अवधि में तेज धूप में अनावश्यक घर से बाहर जाने से बचें। नंगे पैर बाहर नही निकलें, गर्मी के पीक आवर्स में समय रसोई, खाना बनाना, कुकिंग को अवोइड करें। यदि ऐसे समय घर से बाहर जाना आवश्यक हो तो खाली पेट नहीं निकले, आवश्यकतानुसार ताजा भोजन करके ही घर से निकलें।

 

 

 

हल्के रंग के ढीले सूती वस्त्र के कपड़े पहने, सिर मुंह-गर्दन को भी पूरी तरह ढकें। धूप से बचाव के लिए छाता, चश्मा, टोपी, गमछा, तौलिया आदि का उपयोग करें, पानी व तरल पेय पदार्थ साथ रखें और थोड़े-थोड़े अन्तराल पर पर्याप्त पानी पीएं। धूप में शरीर पूर्ण तरह से ढ़का हो। धूप में बाहर जाते समय हमेशा सफेद या हल्के रंग के ढीले व सूती कपड़ों का उपयोग करें। बहुत अधिक भीड़, गर्म घुटन भरे कमरों से बचें, रेल बस आदि की यात्रा अत्यावश्यक होने पर ही करें, दोपहर के समय ए*ल्कोहल, गर्म पेय चाय-कॉफी, कार्बाेनेट सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि का सेवन करने से बचें। बच्चों व पालतू जानवरों को खडे वाहन में नहीं छोड़ें। तरल पेय पदाथों जैसे निंबू पानी, नारियल पानी, ओआरएस का घोल, लस्सी, फ्रूट ज्यूस का सेवन किया जा सकता है।

 

 

 

बच्चे, बीमार व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। कार्य स्थल पर धूप की सीधी रोशनी से बचें। जानवरों को छायादार स्थानों पर रखें व पर्याप्त पीने का पानी दें। हीटवेव के प्रति अति संवेदनशील लोग शिशु एव यंग चाइल्ड, वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं, मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति, हृदय रोगी या उच्च रक्तचाप वाले रोगी और बाहर कार्य करने वाले श्रमिक विशेष सावधानी बरतें।  बिना भोजन किये बाहर न निकलें। भोजन करके एवं पानी पी कर ही बाहर निकलें। गर्दन के पिछले भाग कान एवं सिर को गमछे या तौलिये से ढ़क कर ही धूप में निकलें। रंगीन चश्में एवं छतरी का प्रयोग करें।

 

 

 

 

गर्मी मे हमेशा पानी अधिक मात्रा मे पियें एवं पेय पदार्थाे जैसे निंबू पानी, नारियल पानी, ज्यूस आदि का प्रयोग करें। लू तापघात से प्रायः कुपोषित बच्चे, वृद्ध गर्भवती महिलाएं ,श्रमिक अदि शीघ्र। प्रभावित होते हैं। इन्हें प्रायः 10 बजे से सायं 6 बजे तक तेज गर्मी से बचाने हेतु छायादार ठण्डे स्थान पर रहने का प्रयास करें। लू-तापघात के किसी रोगी की जानकारी देने अथवा किसी प्रकार की सहायता के लिए कन्ट्रोल रूम नंबर 07462-235011 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

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