कोटा: कोटा मेडिकल कॉलेज (Medical College Kota) से संबद्ध तीनों ब्लड बैंकों (Blood Bank) में इन दिनों रक्त की कमी बनी हुई है। सड़क दुर्घटना के घायलों (Road Accident), डायलिसिस (Dialysis) मरीजों, कैंसर (Cancer) पीड़ितों, हार्ट सर्जरी (Heart Surgery) के मरीजों, प्रसूता महिलाओं और 800 से अधिक थैलेसीमिया (Thalassemia) पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता पड़ रही है। इसी को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के इम्यूनो हेमेटोलॉजी एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग (Department of Immuno-hematology and Transfusion Medicine) ने आमजन, सामाजिक संगठनों और युवाओं से अधिक से अधिक रक्तदान (Blood Donation) करने की अपील की है।

कोटा (Kota) संभाग का सबसे बड़ा मेडिकल सेंटर केवल कोटा ही नहीं, बल्कि बारां (Baran), बूंदी (Bundi), झालावाड़ (Jhalawar), सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कई इलाकों के मरीजों को भी उपचार उपलब्ध कराता है। विभाग के अनुसार तीनों ब्लड बैंकों में हर साल 50 से 55 हजार यूनिट रक्त, प्लेटलेट्स (Platelets) और प्लाज्मा (Plasma) की जरूरत होती है।
अस्पताल में 800 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाना पड़ता है। केवल इन बच्चों के लिए ही प्रतिदिन 35 से 40 यूनिट रक्त की आवश्यकता रहती है। इसके अलावा सड़क हादसों के घायल, कैंसर मरीज, डायलिसिस, हार्ट ऑपरेशन, गंभीर प्रसूता महिलाओं और लावारिस मरीजों के इलाज में भी बड़ी मात्रा में रक्त की जरूरत पड़ती है।
विभाग के अनुसार तीनों अस्पतालों-एमबीएस (MBS Hospital Kota), जेके लोन (JK Loan Hospital Kota) और न्यू मेडिकल कॉलेज (New Medical College Hospital Kota) में रोजाना 150 से 180 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। वर्तमान में ब्लड बैंकों में केवल 100 से 110 यूनिट रक्त उपलब्ध है, जबकि इनमें से भी 90 से 100 यूनिट का न्यूनतम स्टॉक सुरक्षित रखना जरूरी होता है। कई गंभीर मरीजों के लिए रिप्लेसमेंट डोनर नहीं मिलने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
विभाग ने समाज के सभी वर्गों, सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी-निजी कार्यालयों से आगे आकर स्वैच्छिक रक्तदान करने तथा रक्तदान शिविर आयोजित करने की अपील की है। इच्छुक संगठन या संस्थान एमबीएस, जेके लोन और न्यू मेडिकल कॉलेज के ब्लड सेंटर से संपर्क कर रक्तदान शिविर का आयोजन भी कर सकते हैं।
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