सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) जिले के चौथ का बरवाड़ा (Chuath Ka Barwara) क्षेत्र के सौदानपुरा गांव में मंगलवार को एक अनोखा विवाह समारोह चर्चा का विषय बन गया। आधुनिकता और दिखावे के दौर में इस शादी ने सादगी, दहेज मुक्ति और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। सौदानपुरा निवासी रामप्रसाद मीणा की पुत्री राजीबाई का विवाह खिजूरी निवासी स्वर्गीय भैरूलाल मीणा के पुत्र अभिषेक के साथ पारंपरिक ‘धराड़ी परण फेरा’ पद्धति से संपन्न हुआ। विवाह में फिजूलखर्ची और दहेज प्रथा से पूरी तरह दूरी रखी गई।

पुरखों की परंपरा को दी प्राथमिकता:
इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें आधुनिक तामझाम के बजाय आदिवासी समाज की प्राचीन परंपराओं को महत्व दिया गया। ‘धराड़ी परण’ पद्धति प्रकृति, पूर्वजों और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।
दहेज मुक्त विवाह बना मिसाल:
वर पक्ष ने दहेज लेने से साफ इनकार कर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। ग्रामीणों और समाज के लोगों ने इसे रिश्तों और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने वाली पहल बताया।
परंपराएं संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी:
समाज के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि आदिवासी समाज (Adivasi Community) की पारंपरिक विवाह पद्धतियां केवल रस्में नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13(3)(क) के तहत आदिवासी समाज की रूढ़ियों और परंपराओं को मान्यता प्राप्त है।
समाज में सकारात्मक संदेश:
इस विवाह को लेकर क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि ऐसी पहल से नई पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहेगी और दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता बढ़ेगी। दोनों परिवारों के इस निर्णय की समाज में सराहना की जा रही है।
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